मास्क न पहनने पर दिल्ली पुलिस द्वारा रोके गए पति पत्नी के वायरल वीडियो के पीछे का सच कुछ और भी हो सकता है !

फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर किसी भी वीडियो को कैसे वायरल किया जाता हैं और किस समय प्रसारित करने से देखने वाले अधिक आते है इसे सोशल मीडिया के प्रोफेशनल अच्छी तरह जानते है।। भारत में एक वीडियो वायरल हुई जिसमे एक युवा महिला अपने पति के साथ कार से जाते हुए दिल्ली पुलिस द्वारा रोकी जाती हैं और वो बदतमीजी करते हुए न केवल दिल्ली पुलिस अपितु मुख्यमंत्री एवम् अन्य नेताओ के लिए भी अपशब्द बोलती हैं तथा चुनौती देती हैं।

यदि इस वीडियो को गौर से देखा जाए तो कुछ प्रश्न खड़े होते है जैसे नाके पर तैनात पुलिस कभी सहयात्री ( Co passenger ) से कागज नहीं पूछती तथा मास्क न लगाने पर भी ड्राइवर को रोकती हैं।। किसी भी गाड़ी को रोकने के बाद उसके ड्राइवर से पहले लाइसेंस दिखाने को कहा जाता है, लाइसेंस अपने कब्जे में लेने के बाद बताया जाता हैं कि उसका कथित कानून के अनुसार चालान किया जा रहा है।। तैनात टीम के साथ ड्यूटी अफसर ( दरोगा या इंस्पेक्टर ) खुद गाड़ी अथवा आरोपी के पास नहीं आता अपितु कांस्टेबल आरोपी को आवश्यकता पड़ने पर इंस्पेक्टर/ सब इंस्पेक्टर के पास लेकर जाता हैं जो कुछ कदम हटकर खड़ा रहता है।। कभी भी पुरुष पुलिस कर्मी किसी महिला से बहस नहीं करता और यदि कोई महिला बदतमीजी भी कर रही हो तो उसे इग्नोर करते हुए महिला पुलिस को बुला लेता है।। इस वीडियो में इंस्पेक्टर रैंक ( महिला ने बोला है कि तीन स्टार ) का अधिकारी सह यात्री की विंडो के पास उससे बहस कर रहा है।

ड्राइवर के पास कोई पुलिस वाला नहीं है।। गाड़ी रुकते ही वीडियो बनानी शुरू कर दी जाती हैं और यह वीडियो भी पुलिस द्वारा बनाई जा रही थी।। पुलिस द्वारा किसी महिला की वीडियो किस अधिकार से बनाई गई ? यदि सरकारी आदेश से बनी है तो सोशल मीडिया पर किसी पुलिस कर्मी द्वारा कैसे वायरल की जा सकती है और यदि किसी पुलिस कर्मी ने निजी फोन से बनाई है तो उसके विरूद्ध क्या कार्यवाही हुई या होगी ? अंत में कार चालक लड़के को चार पांच पुलिस वाले काबू में करते हुए दिख रहे हैं जबकि आवाज़ सुनाई दे रही है कि चलो मैं थाने चलता हूं ?? महिला को एक सिविल कपड़ों में खड़ी लड़की थाने जाने के लिए बोलती दिखाई दे रही है लेकिन उसने भी मास्क नहीं लगाया हुआ था। जब इन सवालों के साथ किसी मित्र पुलिस अधिकारी से सम्पर्क किया गया तो उसका जवाब था कि पत्रकार बनकर पुलिस से भी आगे न सोचो, कल से वाइन शॉप बन्द रहेंगी, उसके इंतेजाम की चिंता करो और मुस्कुरा दिए।

यद्धपि News Number इसकी पुष्टि नहीं करता किन्तु इस वीडियो को वायरल करने और फिर न्यूज चैनल्स पर इसको प्रमुख समाचारों में दिखाने के पीछे क्या सम्भव हो सकता है ? इस प्रश्न पर कुछ लोगो का अनुमान है कि क्योंकि दो दिन के कथित करोना कर्फ्यू के दौरान काफी संख्या में दिल्ली की जनता बाहर निकल रही थी तथा पुलिस द्वारा रोके जाने पर विरोध कर रही थी तो इस प्रकार जनता के मन में से पुलिस का डर खत्म होने लगा था।। पुलिस नाकों पर भी स्थानीय जानता तथा युवा इकट्ठे होकर पुलिस कर्मियो पर फब्तियां कस रहे थे या अपशब्द बोल रहे थे बेशक इसके पीछे उनकी बौखलाहट हो तो इससे पुलिस कर्मियों का मनोबल टूट रहा था।।। क्योंकि पुलिस कर्मी भी आम जनता के ही हिस्से होते है तो उन्हें भी अहसास होने लगा था कि इससे सामान्य जनता को व्यर्थ की तकलीफ़ हो रही है और दबे मन से वो भी जनता के साथ होने लगे थे जो किसी भी पुलिस स्टेट के लिए भयावह सपना हो सकता है।

सम्भव है कि जनता में पुलिस का डर बैठाने के लिए अथवा पुलिस कर्मियो को मोटिवेट करने के लिए यह सब फिल्माया गया और न्यूज चैनल्स पर भी दिखाया गया।। याद रखिए कि शोर मचाने वाली महिला अपने पढ़े लिखे होने की बात को भी दोहराती है और खुद को सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा भी बताती हैं।। वैसे भी कोई भी पढ़ा लिखा व्यक्ति इस प्रकार से अपनी पढ़ाई या इन शब्दों का उपयोग नहीं करता।। इससे यह संदेश दिया गया कि यदि आप पढ़े लिखे है या कानून का सहारा लेना जानते है तब भी पुलिस से बड़े नहीं है और उनके पैसे वाले होने की गवाही तो उनकी कार दे रही थी।। लेखक ने भी कल कर्फ्यू के दौरान विभिन्न नाकों पर पुलिस का सामना करते हुए स्थितियों को प्रत्यक्ष देखा है ।।।