देखो ढाबे वालो, तुम ये काम न करो। देश का नाम, बदनाम न करो, ये काम न करो।।

मै निकला, गड्डी ले के; इक मोड़ आया, में ओत्थे गड्डी छोड़ आया ।।।।।। , समाज और अपने जैसा समाज भी इंसान की बुनियादी कमजोरी होती हैं क्योंकि इंसान को social animal भी कहा जाता है। कारोबारी समूह के दृष्टिकोण से ट्रक चलाना अपने आप में शारीरिक से अधिक मानसिक रूप से थका देने वाला काम है यद्धपि देखने से लगता है कि ड्राइवर को करना ही क्या होता है विशेषकर जब कनाडा या अमेरिका के ट्रक चालक हो।। किन्तु ऐसा नहीं है और घर परिवार से दूर अपनी संस्कृति से अलग अकेलेपन से लड़ाई लड़ना खुद में बहुत मेहनत का काम होता है।

शायद इसीलिए ट्रक ड्राइवर विश्राम एवम् खाने के लिए हाईवे के अपने निर्धारित ढाबों या रेस्ट एरिया में रुकते हैं। भारत में भी यद्धपि लगातार बहुत लम्बी दूरी तक की यात्राएं नहीं होती क्योंकि इसके पीछे सड़को की कंडीशन तथा ट्रक्स का आरामदेह न होना भी है और विभिन्न राज्यो के टोल नाकों पर वसूली करती पुलिस के अतिरिक्त आर्थिक रूप से कमजोर होना भी है।। फिर भी भारत या दक्षिण एशिया में लगभग तीन से चार सौ किमी के बाद ड्राइवर अपने चिन्हित ढाबे पर रुकते हैं और कुछ समय आराम करते हैं तथा खाना खाते हैं। ड्राइवर्स की पहली पसंद वो ढाबे होते है जहां उनके इलाके का खाना बनाने वाला हो तथा जिसका व्यवहार अच्छा हो ।। क्योंकि कनाडा से अमेरिका को फल, सब्जियों के अतिरिक्त बहुत से आवश्यक पदार्थो की सप्लाई ट्रकों के माध्यम से होती है और इसके लिए सड़क मार्ग से कम से कम हजार मील का सफ़र तो सामान्य है।

 इसके साथ ही यह भी उल्लेखनीय है कि अधिकांश ट्रकर्स मूल रूप से भारतीय पंजाब से होते हैं तो स्वाभाविक है कि उनके लिए हाईवे पर रेस्ट हाऊस भी भारतीय मूल के लोगो के ही अधिक होंगे यद्धपि बहुत से पाकिस्तानी पंजाब के लोग भी इस कारोबार में लगे हुए हैं किन्तु वो भी खुद को इंडियन ही बताना पसंद करते है। अक्सर महसूस किया गया है कि इंडियन रेस्ट एरिया या हाईवे होटेल्स के भारतीयों का व्यवहार जैसा होना चाहिए वैसा नहीं होता। शायद इसके पीछे उनकी फ्रस्ट्रेशन भी एक कारण है या संस्कृति के अंतर को न समझ पाना तथा वहां के कल्चर को एडॉप्ट न करना।

अक्सर भारतीय ढाबा मालिको द्वारा दुर्व्यवहार करने तथा अपेक्षाकृत साफ सफाई न रखने की शिकायते मिलती हैं और जब पानी सिर से उपर निकलने लगा तो कनाडा की एक ट्रक संस्था ने 15 दिन के लिए इंडियन ढाबों के बहिष्कार की अपील की है जिसमे उपरोक्त शिकायते भी स्पष्ट रूप से बताई गई है।। डियर इंडियन्स को इन्हे अपना विरोध या शिकायत न समझते हुए ट्रक ड्राइवर्स का लगाव तथा मोहब्बत समझना चाहिए क्योंकि ऐसा करके वो उनके भविष्य और कारोबार को बेहतर बनाने में सहयोग कर रहे हैं।। रहिमन निंदक चाहिए, आंगन कुटी छवाए।। आलोचना या कमी व्यक्ति को बेहतर देखने के लिए होती हैं न कि किसी ईर्ष्या के लिए बशर्ते सार्वजनिक मंच से न की जाए।।