संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 10 अप्रैल शनिवार को कुंडली, मानेसर- पलवल हाई वे 24 घंटे के लिए काम करने की घोषणा।

जैसे ही भारतीय मीडिया किसान आंदोलन की समाप्ति और दिल्ली की सरहदों पर धरना दें रहे किसानों को वापसी की खबरे फैलाना शुरू करता है वैसे ही संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा अपनी उपस्थिति तथा उत्साह दर्ज करा दिया जाता हैं। क्योंकि ऐसा कहा जा रहा था कि गेंहू की कटाई के मौसम के कारण धरना स्थलों से किसानों की संख्या कम हो गई है तथा सरकार कभी भी करोना महामारी के बहाने धरना समाप्त करा सकती हैं किसान नेताओ द्वारा सरकार को एक और प्रतीकात्मक भेंट चढ़ाने की घोषणा कर दी गई। कुंडली बॉर्डर स्थित संयुक्त किसान मोर्चा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि शनिवार 10 अप्रैल को कुंडली - मानेसर - पलवल हाई वे को 24 घंटे के लिए जाम करके सरकार को किसान विरोधी कानूनों के विरोध में प्रदर्शन दर्ज कराया जाएगा। दिल्ली के चारो ओर 135.6 किमी लंबे इस रिंग रोड से प्रतिदिन लगभग 50,000 ट्रक गुजरते हैं जो पहले दिल्ली के अंदर से निकलते थे क्योंकि हरियाणा के एक दिशा से दूसरी दिशा में जाने के लिए भी दिल्ली के अंदर से जाना पड़ता था। इसके अतिरिक्त अन्य वाहन भी समय की बचत के लिए इस सड़क का उपयोग करते है। इससे पहले भी इस राजमार्ग को 5 घंटे के लिए जाम किया गया था लेकिन क्योंकि सरकार द्वारा किसानों के धरने तथा आंदोलन को इग्नोर किया जा रहा था तो किसान नेताओ को भी अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। लेकिन किसान आंदोलनकारियों द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया कि रास्ता जाम पूर्ण रूप से शांति पूर्वक किया जाएगा तथा जाम के कारण फसे हुए ड्राइवर्स को चाय, पानी तथा भोजन का लंगर भी दिया जाएगा। यद्धपि हरियाणा पुलिस द्वारा भी बयान जारी करके कहा गया है कि कानून हाथ में लेने वाले उपद्रवियों पर कानूनी कार्यवाही की जाएगी। इसके अतिरिक्त सरकार को सीधी चुनौती देते हुए लक्खा सिधाना ने भी दिल्ली बॉर्डर पर हजारों समर्थकों एवम् वाहनों के काफिले के साथ पहुंचकर सड़क जाम में हिस्सा लेने की घोषणा की है तथा वो पहुंच भी रहा है। लक्खा सिधाना 26 जनवरी को लाल किले पर हुई घटना का आरोपी है तथा उसका गिरफ्तारी वारंट भी दिल्ली पुलिस द्वारा जारी किया हुआ है। करोना के कारण धरना स्थगित करने की अफवाहों के सन्दर्भ में राकेश टिकैत ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में किसान धरना स्थल से वापिस नहीं जाएंगे और यदि सरकार शाहीन बाग़ आंदोलन की तरह किसान आंदोलन को भी बल पूर्वक हटाने का कोई विचार कर रही हो तो उसे न केवल निराशा हाथ लगेगी अपितु स्थिति बिगड़ भी सकती हैं। कुंडली बॉर्डर तथा टिकरी बॉर्डर पर किसानों द्वारा गरमियों के मद्देनजर पराली एवम् बांस से सुंदर लगभग स्थाई बसेरे बनाए जा रहे हैं जिनमें एसी तथा कूलर सहित सभी आवश्यक सुविधाएं हैं।

दिल्ली पुलिस एवम् निहंग साहेबान के बीच तीखी बहस के बाद विवाद सुलझा और दिल्ली पुलिस द्वारा निहंग बाबा जी की अपील स्वीकार करने का आश्वासन।।

गर्मियों के मौसम में घोड़ों को होने वाली परेशानी के कारण निहंग साहेबान द्वारा दिल्ली पुलिस से बेरीकेट्स हटाने की मांग पर विचार के लिए अधिकारी तैयार।। ...

अचानक आयी आंधी के कारण गाजीपुर बॉर्डर स्थित किसान आंदोलन स्थल पर कई टेंट तथा अस्थाई डेरों को नुकसान पहुंचा।

गाजीपुर बॉर्डर स्थित किसान आंदोलन स्थल पर तेज आंधी के कारण कई तम्बू तथा डेरे गिर गए । ...

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में संसद के घेराव की घोषणा के साथ ही समझा जा सकता है कि आंदोलन एक बड़े मोड़ की ओर बढ़ गया है

कुंडली बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आयोजित विशेष प्रेस कांफ्रेंस में किसान नेता उग्राहां साहब ने सरकार को सीधी चुनौती देते हुए संसद घेराव की घोषणा कर दी। ...

किसान आंदोलन स्थल पर किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा गरमियों के सामने की तैयारी करते हुए स्टेट ऑफ़ आर्ट तथा क्रियेटिव उदाहरण प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

कड़कड़ाती सर्दी और बारिश के साथ बर्फीली हवाओं और जीत चुके किसान अब दिल्ली की सरहदों पर अपने मोर्चो से गर्मी को चुनौती देने के लिए भी तैयार है। ...

किसान आंदोलन को समर्थन देते देश विदेश के धरती पुत्र और इसमें एक और प्रतिष्ठित नाम जुड़ा है अमेरिका के गुरिंदर सिंह खालसा का।

दिल्ली की सरहदों पर चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देने हेतु एक ओर स्थानीय निवासी भी आते है तो विदेशो में रहने वाले भारतीय जिनकी आत्मा में भारत की मिट्टी की सौंधी खुशबू महकती है वो भी निरन्तर साथ खड़े होकर अपना समर्थन देते है। ...

होली के रंग, किसानों के संग ! वैसे तो त्योहारों की खुशी अपने परिवारों के साथ अधिक होती हैं लेकिन विपत्ति काले मर्यादा न अस्ति को मानते हुए किसान आंदोलनकारियों ने धरना स्थल पर ही होली उत्सव मनाया।

भारत उत्सवों और तीज त्यौहारों का देश है और ऐसे में होली को विशेष दर्जा केवल इसलिए दिया जाता हैं क्योंकि एक ओर तो सर्दी की विदाई होती हैं तो दूसरी ओर लहलहाती फसलें किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए पुकार रही होती हैं। इस वर्ष की होली किसानों के बीच, किसानों के साथ। ...

किसान आंदोलन कारियो द्वारा भारत बन्द के कारण देश भर से बन्द की सफलता या आंशिक प्रभाव !

26 मार्च संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा भारत बंद का आहवान किया गया जिसे जनता के अतिरिक्त विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी समर्थन दिया। इसके परिणाम स्वरूप देश के अधिकांश हिस्सों में शांति पूर्वक बन्द रखा गया। रास्ते जाम किए गए तथा रेले हैं गई। ...

किसान आंदोलन का बदलता स्वरूप और लगातार चलता डेडलॉक क्या किसी आने वाले तूफान की आशंका हो सकता है ?

दिल्ली की सरहदों पर किसानों का धरना फिर सरकार से बातचीत और ट्रेक्टर परेड से लेकर लाल किला तथा अब राज्यो मे होने वाले चुनावों में किसान नेताओ की महापंचायत। इन सब के साथ बातचीत टूटे हुए भी दो महीने बीत चुके हैं और सरकार खामोश हैं। क्या यह खामोशी किसी तूफान का संकेत है ? ...

क्या दिल्ली की सरहदों पर चल रहा किसान आंदोलन अपनी समाप्ति की ओर है ? क्या लगातार चार महीने से मोर्चा लगाकर बैठे किसानों की थककर वापसी हो रही है ? क्या सरकार इस विश्व प्रसिद्ध आंदोलन को समाप्त करने की चालों में कामयाब हो रही हैं?

भारत के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जिसमे से अधिकांश चैनल गोदी मीडिया का खिताब प्राप्त कर चुके है लगातार किसान आंदोलन को असफल और समाप्ति की ओर बता रहा है। News Number की टीम ने हालात का विश्लेषण किया जिसकी रिपोर्ट प्रस्तुत है। ...

23 मार्च शहीद भगत सिंह और उनके साथियों की शहादत को सलाम करते हुए चौथे महीने में दाखिल हो चुके किसान आंदोलन कारी फिर से इन्कलाब जिंदाबाद का नारा बुलन्द करेंगे

23 मार्च का दिन जब हिंदुस्तान की आज़ादी की मशाल में तीन रण बंकुरो ने हंसते हंसते अपनी कुर्बानी दे दी थी। उन्ही के सम्मान और सत्कार में दिल्ली की सरहदों पर मोर्चा लगाकर बैठे किसानों ने व्यापक रूप से उनकी कुर्बानियों को याद करने का निर्णय लिया है। ...

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली की सरहदों पर चल रहे किसान आंदोलन की बागडोर महिलाओ के हाथ में देखकर महसूस किया जा सकता था कि माता भागो प्रत्येक नारी में जिंदा है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और इस अवसर पर समाज का कथित उच्च वर्ग एक ओर तो सेमिनार तथा समारोह आयोजित कर रहा था वहीं दूसरी ओर किसान परिवारों की माताएं बहनें एवम् बेटियां घरों से निकल कर आंदोलन का हिस्सा बनी हुई थी। धरती की बेटियां धरती पर संघर्ष करती हुई नजर आईं ...

किसान आंदोलन की आज की कड़ी में दिल्ली के चारो ओर विभिन्न राज्यो को जोड़ने वाले केएमपी ( पेरीफेरल रोड ) पर सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चक्का जाम किया जा रहा है।

किसान आंदोलन चलते हुए सौ दिन पूरे हो चुके है लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। किसानों की ओर से सरकार का ध्यान आकर्षित करने एवम् अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है जिसमे आज पांच घंटे के लिए पेरीफेरल रोड पर चक्का जाम किया जा रहा है। ...

किसान आंदोलन के सौ दिन और दिल्ली की सरहदों पर आंदोलनकारियों की एक लंबे समय तक धरने की तैयारियां।

26 नवम्बर 2020 पंजाब में भारत सरकार द्वारा पारित किसान विरोधी कानूनों के विरोध का कोई प्रभाव न होता देखकर किसानों ने दिल्ली में धरने की घोषणा कर दी और हज़ारों ट्रैक्टर ट्रालियों के साथ दिल्ली कूच कर दिया। लेकिन सरकार द्वारा उन्हे दिल्ली में प्रवेश नहीं करने दिया गया तो सीमा पर ही धरना शुरू कर दिया जिसे सौ दिन पूरे हो चुके है। NewsNumber.com की टीम आज जमीनी हकीकत देखने किसानों के बीच थी। ...

संत और शुभ विचार किसी जाति धर्म विशेष के नहीं अपितु सम्पूर्ण मानवता के लिए होते है जिसकी झलक आज कुंडली बॉर्डर पर दिखाई दी।

भारत सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सरहदों पर चल रहा आंदोलन अपने चौथे महीने में प्रवेश कर चुका है और लगता है कि किसानों ने इसे अपने जीवन का हिस्सा समझकर आंदोलन तीर्थ को अपना दूसरा घर बना लिया है ...

पगड़ी संभाल जट्टा, पगड़ी संभाल ओए लूट गया माल तेरा, लूट्ट गया माल ओए।।

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा जारी प्रेस नोट में अन्य विषयों के अतिरिक्त 23 फ़रवरी को "पगड़ी संभाल जट्टा" दिवस के रूप में मनाने का निश्चय किया गया है। ...