ट्रेड वार से वर्ल्ड वार की ओर बढ़ते हुए न्यू वर्ल्ड ऑर्डर की शुरुआत है या अंत ?

जैसे कूटनीति और राजनय संकेतो को ग्रहण करके डीकोड करना तथा ऐसे संकेत देना जो समझने वाले को समझ आ जाए का दूसरा नाम है वैसे ही द इकोनॉमिस्ट मैगजीन के कवर पेज को बहुत से विश्लेषक पश्चिमी शक्तियों का संदेश बोर्ड कहते है। स्वेज़ नहर में एवरग्रीन मालवाहक पोत के फसने से ब्लॉकेज न केवल जहाजों पर लगी अपितु कुल विश्व व्यापार का काफी बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ और वर्तमान में अधिकतम निर्यात करने वाले देशों में चीन सर्वोच्च है। इसके कारण कुछ यूरोपियन देशों में वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ी क्योंकि एयर ट्रांसपोर्ट करना मजबूरी थी तो बहुत से देशों को तेल आपूर्ति बंद होने का डर भी सताया होगा! एक विश्लेषक के अनुसार इस कवर पेज का अर्थ सीधे सीधे चीन को सांकेतिक भाषा में धमकी है कि विश्व शक्तियां कभी भी उसका तमाम व्यापार एक झटके में बन्द कर सकती हैं और चीन तथा उसके सहयोगी देशों को आर्थिक स्थिति से कमजोर कर सकती हैं। लेकिन दूसरे पक्ष के अनुसार बेशक स्वेज नहर को किसी साज़िश के तहत रोका गया था फिर भी इस हादसे का सर्वाधिक लाभ चीन को ही मिलना तय है। उनके अनुसार इस ब्लॉकेज पीरियड में चीन से इस्तांबुल रेलवे लाइन कार्यरत हो गई और बड़ी मात्रा में यूरोप के लिए कंटेनर रेल मार्ग से भेजे गए। इसके अतिरिक्त चीन की महत्वकांक्षी परियोजना वन रोड वन बेल्ट में भी अन्य देशों की रुचि बढ़ी तथा चीन से यूरोप तक वाया पाकिस्तान, ईरान, तुर्की के भूमार्ग को भी ठोस आधार प्राप्त हुआ। सीपेक योजना के विकल्प के रूप में एक अन्य सड़क/रेल मार्ग यूरेशियन देशों से वाया अफगानिस्तान ईरान भी बनाए जाने की योजना है।