भारत रूस सम्बन्धों के सन्दर्भ में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की भारत - पाकिस्तान यात्रा और भारत सरकार की बदलती नीतियों के कारण सम्भावित लाभ हानि !

वैसे तो अवधारणा यही है कि विदेश नीति में कोई किसी का न परमानेंट मित्र होता है न शत्रु किन्तु किसी एक लॉबी से निरन्तर दीर्घकाल से चल रहे सामरिक सहयोग के सम्बन्धों में अचानक परिवर्तन अक्सर बड़ी उथल पुथल का कारण बन सकते है। भारत तथा सोवियत संघ के शांति, मैत्री तथा सुरक्षा के सम्बन्धों को भी आधी शताब्दी गुजर चुकी हैं और भारतीय सेना के पास 67 प्रतिशत हथियार या तो रूस निर्मित है या रूस के सहयोग से मिलकर बनाए गए हैं किन्तु फिर भी भारत सदैव गुट निरपेक्ष भाव से अपनी नीतियां बनाता रहा और अमेरिकी लॉबी से भी संतुलन बनाए रखा। किन्तु 2014 के बाद वर्तमान मोदी सरकार ने विदेशनीति में आमूल चूल परिवर्तन कर दिए जिनका दुष्प्रभाव अब नजर आने लगा है। एक लोकोक्ति है कि घर का दूर पड़ोसी नेडे और इसको हमने 1971 की भारत पाक जंग के समय अनुभव भी किया था। सूचना के अनुसार रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव 4 - 5 अप्रैल को भारत यात्रा पर आने वाले हैं तथा उनके साथ अफगानिस्तान के लिए रूस के विशेष दूत जर्गाई लावारोफ भी होंगे। इसके बाद वो पाकिस्तान के दो दिवसीय दौरे पर जाएंगे और जैसा कि रूस में पाकिस्तान के राजदूत शफकत अली खान ने 31 मार्च के अपने प्रेस रिलीज में बताया था कि विदेश मंत्री की इस यात्रा से सामरिक एवम् मैत्री सम्बन्धों को नई दिशा प्राप्त होने की आशा है। भारत यात्रा का उद्देश्य यद्धपि अभी स्पष्ट नहीं है किन्तु अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत को अफगानिस्तान शांति प्रक्रिया में सहयोग देने के लिए दबाव बनाया जा सकता है। पाकिस्तान के सम्बन्धों के सन्दर्भ में ध्यान रखना चाहिए कि अमन 2021 युद्धाभ्यास में रूस ने भारत की आपत्ति के बावजूद अपना गोर्बा चोफ युद्धपोत पाकिस्तान भेजा था क्योंकि उसी श्रेणी के आईएनएस तलवार भारतीय नौसेना का हिस्सा है और भारत नहीं चाहता था कि गोपनीयता भंग हो। इसके अतिरिक्त रूस पाकिस्तान के बीच गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट भी शुरू हो चुका है तथा क्वेटा तफ्तान रेल प्रोजेक्ट भी शुरू होने की उम्मीद है। भारत से रूस की तल्खी का अंदाज़ा सर्गेई लावरोव के दिसम्बर में Russia International Affairs Council में दिए गए इस बयान से लगाया जा सकता है जिसमे उन्होंने भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया तथा अमेरिका के क्वार्ड्स ग्रुप की आलोचना करते हुए कहा था कि पश्चिमी शक्तियां भारत को चीन के विरूद्ध खेल में उलझा रही है और एशियन पैसिफिक ( इंडो पेसिफिक ) में भारतीय भूमिका रूस भारत के सम्बन्धों को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि भारत में रूस के राजदूत निकोलेव कुदाशेव ने 31 दिसम्बर को भारतीय प्रेस से बात करते हुए रूस पाकिस्तान के सम्बन्धों से भारत रूस मैत्री पर कोई असर न होने का आश्वासन दिया था किन्तु भारत द्वारा 5.5 बिलियन डॉलर के S 400 के सौदे को रूस ने ही लंबे समय से ठंडे बस्ते में डाला हुआ है और अब अमेरिका की धमकी भी भारत को मिलने लगी है कि भारत रूस से यह सौदा रद्द करें अन्यथा प्रतिबन्ध लगाए जा सकते हैं। मिस्टर सर्गेई लावरोव रूस में वालदमिर पुतिन के बाद सबसे शक्तिशाली नेता माने जाते हैं और साधारणतः रूस, चीन जैसे देशों की परम्परा बहुत कम बयानबाजी की रहती हैं। Even we should hope for the best