स्वेज नहर की ब्लॉकेज एक हादसा या साज़िश ? मिस्र के अधिकारियों द्वारा भारतीय चालक दल को हाउस अरेस्ट करने के साथ जानबूझ कर रची गई साज़िश के दृष्टिकोण से जांच की जा रही है।

पुरानी कहावत है कि जिस देश का समुद्री रास्तों पर वर्चस्व होता है विश्व व्यापार उसी के हाथो की कठपुतली बन जाता है। यूरोप और एशिया की ओर जल मार्ग से मालवहन की सबसे महत्वपूर्ण स्वेज नहर पिछले सप्ताह एक बड़े मालवाहक शिप के फसने के कारण ब्लॉक हो गई थी जिसके कारण अरबों डॉलर का नुकसान हुआ। जर्मन कम्पनी बर्न हार्ड शिपमैन का पनामा में पंजीकृत 400 मीटर लंबा शिप एवरग्रीन लगभग 2 लाख टन माल लादकर चीन से नीदरलैंड के पोर्ट रोडर्डम के लिए चलता है उसके सभी 25 क्रू मेंबर्स भारतीय नागरिक है और वो स्वेज नहर से गुजरते समय इस प्रकार फंस जाता हैं कि आने जाने वाले सभी जहाज़ दोनों ओर रुक जाते है। सभी देशों द्वारा उसे हटा कर रास्ता साफ करने का प्रयत्न किया जाता हैं तथा एक सप्ताह की मेहनत के बाद आवागमन धीरे धीरे शुरू होता है। इसी समय इजरायल द्वारा एक वैकल्पिक मार्ग की आवश्यकता के साथ साथ रूस से इस सम्बन्ध में बातचीत की घोषणा भी कर दी गई जिसके कारण विश्व जगत को संदेह होने लगता है कि क्या यह किसी षड्यंत्र के तहत जानबूझकर तो यह हादसा नहीं किया गया क्योंकि इससे पहले ऐसा उदाहरण नहीं मिलता। रास्ता खुलने के साथ ही मिस्र की सी सी सरकार द्वारा जांच पड़ताल शुरू कर दी गई है और चालक दल के सभी भारतीय नागरिकों को रोक लिया गया है। मिस्र सरकार के प्रवक्ता के अनुसार जब तक जांच पूरी नहीं होती तब तक चालक दल को कहीं भी जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी तथा यदि साज़िश का कोई संदेह या सबूत मिलता है तो चालक दल के भारतीयों के विरूद्ध अपराधिक मामले के तहत गिरफ्तार करके उचित कानूनी कार्यवाही की जाएगी। भारत सरकार ने इस विषय में चिंता व्यक्त करते हुए भारतीय नागरिकों को दुर्घटना के लिए बलि का बकरा बनाए जाने की आशंका जताई है। आशा है कि शीघ्र ही सच्चाई सामने आएगी और सत्य की विजय होगी।