शहीद ए आजम भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त के लिए मुकदमा लडने वाले साहसी वकील तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत के पहले राजदूत आसिफ़ अली साहब की पुण्य तिथि पर उन्हे खिराज़ ए अकीदत।।

अंग्रेज़ी साम्राज्य के ज़ुल्म और गुलामी के माहौल में शहीद ए आजम भगत सिंह ने असेम्बली हाल में एक धमाका किया तथा पकड़े गए। खौफ का आलम ये था कि उनका मुकदमा लडने के लिए वकीलों में साम्राज्य सरकार ने दहशत पैदा की हुईं थीं किन्तु लंदन से 1909 में वकालत की डिग्री लेकर आया युवक भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त के लिए कानूनी चोगा पहनकर खड़ा हो गया।। इस युवा वकील का नाम था "आसिफ अली" और जन्म हुआ था उत्तर प्रदेश राज्य के बिजनौर जिले की स्योहारा तहसील में तिथि थी 11 मई 1888। इनकी कॉलेज की पढ़ाई दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से पूरी हुई और लंदन वकालत की पढ़ाई के समय ही ये हिंदुस्तान की आज़ादी के लिए लड़ रहे देश प्रेमियों के सम्पर्क में आए। आपकी मुलाकात अरुणा गांगुली से हुई जो इनसे 21 साल छोटी थी और दोनों ने जीवन पर्यन्त साथ रहने का निर्णय कर लिया तथा आदरणीया, अरुणा गांगुली से अरुणा आसिफ अली बन गई जिन्हे बाद में भारत सरकार द्वारा भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया। अमेरिका से आने के बाद आसिफ़ अली साहब को उड़ीसा के गवर्नर बतौर भी जन सेवा का अवसर प्राप्त हुआ और स्विट्जरलैंड के बर्न में आप भारत के राजदूत नियुक्त हुए। एक अप्रैल 1953 के दिन बर्न स्थित अपने कार्यालय में आपने अंतिम सांस ली तथा एक अध्याय! एक अप्रैल को समाप्त हो गया।। News Number परिवार की ओर से आसिफ अली साहब को सादर श्रद्धांजलि।।