कूटनीतिक भाषा और राजनयिकों का गिरता स्तर तथा आपसी सम्बन्धों में बढ़ती तलखियां जिसका उदाहरण कनाडा - चीन सम्बन्धों के सन्दर्भ में चीनी राजनयिक द्वारा अपमानजनक टिप्पणी से सामने आया है।

कूटनीति या डिप्लोमेसी एक विशेष प्रकार की संस्कृति के लिए जानी जाती है जिसमे कभी कोई बात सीधे तौर पर न कहीं जाती हैं और न कहनी चाहिए लेकिन शायद समय बदल रहा है या आपसी विरोध घृणा के स्तर तक पहुंच रहा है कि राजनयिक भी अपनी मर्यादा भूलकर सड़क छाप भाषा बोलने लगे हैं। चीन से किसी भी कारणों से असहमत होना और अपने राष्ट्रीय हितों में उसकी आलोचना करना एक स्वाभाविक कदम है तथा इसके लिए यथा संभव कदम भी उठाना किसी भी सरकार का अधिकार है। यद्धपि कनाडा में बड़ी संख्या में चीनी मूल के नागरिक पी आर स्टेटस तथा नागरिकता लेकर रहते है और उनके माध्यम से ही चीन की आंतरिक स्थिति की जानकारी दुनियां तक पहुंचती हैं लेकिन कनाडा सरकार द्वारा अपने खुले और स्वतंत्र समाज की तुलना में चीन के मुस्लिम्स के हालात पर कुछ कहना चीनी राजनयिक को इस हालत तक बौखलाहट का शिकार कर सकता है यह यकीनन हैरानी का कारण बन गया। ब्राज़ील की राजधानी रिओ डी जेनेरियो स्थित चीनी दूतावास में नियुक्त महावाणिज्य दूत ( Trade Minister ) ली यांग ने बयान के साथ साथ ट्वीट करके कनाडा के प्रधानमन्त्री जस्टिन ट्रुडो को अमेरिका का बच्चा कहते हुए अत्यन्त निंदनीय तथा अपमानजनक भाषा का उपयोग किया। विवाद की शुरुआत चीन में मुस्लिम्स समाज की दयनीय स्थिति तथा उन्हें धार्मिक आज़ादी न मिलने के अमानवीय व्यवहार की कनाडा सरकार द्वारा आलोचना करने तथा चीन पर प्रतिबन्ध लगाने से शुरू हुई जिसके उत्तर में चीन द्वारा भी कुछ प्रतिबन्ध लगाए गए। किन्तु बयानबाजी का इतना गिरता स्तर कभी भी राजनयिक समाज में स्वीकार्य नहीं किया जा सकता।।