किसान आंदोलन का बदलता स्वरूप और लगातार चलता डेडलॉक क्या किसी आने वाले तूफान की आशंका हो सकता है ?

चार महीने से चल रहे किसान आंदोलन की चर्चा अचानक भारतीय ( गोदी ) मीडिया से गायब हो चुकी है यहां तक कि कोई नकारात्मक खबर भी नहीं चलती। दूसरी ओर सरकार से चल रही वार्ता का क्रम टूटे हुए भी दो महीने बीत चुके हैं। कभी कभी अफवाह फैलाई जाती हैं कि किसान आंदोलन समाप्ति की ओर है तथा किसान थक हारकर अपने अपने घरों को वापिस लौट रहे हैं तो किसानों की ओर से फिर किसी कार्यक्रम का भव्य आयोजन हो जाता हैं और आंदोलन तीर्थ स्थल की यात्रा करने वाले देख लेते हैं कि किसी लंबी लड़ाई की तैयारी है क्योंकि ये निश्चय कर अपनी जीत करों वाले के बेटे बेटियां बैठे है। ट्रेक्टर रैली से लेकर 26 जनवरी और गिरफ्तारी का डर तथा बीजेपी समर्थक गुंडों द्वारा पथराव जैसी उंच नीच के बावजूद किसान नेताओ ने पांचों राज्यों में होने वाले चुनावों के समय अपनी महापंचायतें करनी शुरू कर दी है जिससे बीजेपी को निश्चित रूप से तकलीफ़ हुई होगी। क्योंकि आंदोलन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रचारित हो चुका है और विभिन्न देशों की सरकारों ने भी नोटिस लिया है तो फिलहाल भारत सरकार के लिए ताकत के इस्तेमाल की सम्भावना नहीं लगती फिर भी सरकारी तंत्र शांत कैसे बैठ सकता है और उस पर भी जब पंजाब तथा उत्त प्रदेश के चुनाव भी अगले साल होने है। शायद करोना के शोर तथा लॉक डाउन जैसे किसी पुराने पैतरे को आजमाने की कोशिश की जाए जैसा पिछले साल शाहीन बाग़ के CAA तथा NRC आंदोलन के साथ सफलता से किया था। क्योंकि फिलहाल किसानों को पूर्व नौकरशाहों सहित समाज के सभी वर्गो का समर्थन भी मिल रहा है तथा अपने अनुभव से किसान नेता भी सरकारी साजिशों को पहले ही भांप लेते है। जिसके कारण इस आंदोलन को धार्मिक या क्षेत्रीय रंग नहीं दिया जा सका। आज किसान नेताओ ने 26 मार्च को पूर्ण रूप से भारत बंद का आह्वान किया है और आशा की जाती है कि किसान आंदोलनकारियों की इस मांग को व्यापक समर्थन भी मिलेगा। इसी के साथ राकेश टिकैत का एक ट्वीट चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है जिसमे उन्होंने पुनः बेरीकेट्स तोड़कर दिल्ली में घुसने की योजना का संकेत दिया है। बहरहाल अभी विभिन्न दिशाओं में केवल कयास लगाए जा सकते हैं किन्तु यह सत्य है कि बीजेपी सरकार पंजाबी संस्कृति और सभ्यता को समझने में अभी भी नाकाम रही है अथवा जानबूझकर अनजान बन रही है जो किसी अच्छे भविष्य के संकेत नहीं हो सकते

किसान विरोधी कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद भारतीय प्रधान मंत्री को किसान नेताओ का खुला पत्र।

19 नवम्बर सुबह नौ बजे भारत के अभी सूचना और प्रसारण माध्यमों पर भारतीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी अवतरित हुए। आशा की जा रही थी कि श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की शुभकामनाए देने के लिए उनका संबोधन होगा क्योंकि शीघ्र ही पंजाब में चुनाव भी होने है।हालांकि उससे दो दिन पहले ही उनके निकटतम माने जाने वाले अमित शाह ने करतार पुर कॉरिडोर को दोबारा शुरू करने की घोषणा कर दी थी। ...

किसान आंदोलन स्थल सिंघू बॉर्डर दिल्ली में श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव पर शोभा यात्रा एवम् एसकेएम द्वारा जारी प्रेस नोट।

21 नवम्बर 2021 भारतीय प्रधान मंत्री द्वारा खेती विरोधी कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद आज दिल्ली सरहद स्थित किसान आंदोलन स्थल पर श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव के उल्लास में शोभा यात्रा निकाली गई और संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आपसी चर्चा के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। ...

तेजी से रेडिक्लाईजेशन और नफरत की आग में झुलसता बारूद के ढेर पर बैठा भारत !

भारत ! एक देश जिसे दुनियां उसकी सॉफ्ट पॉवर, सर्वधर्म समभाव, लोकतंत्र और समाजिक सौहार्द के कारण आदर सम्मान की नज़रों से देखती थी। ...

सिंघू बॉर्डर पर किसान आंदोलन स्थल से हत्या के सम्बन्ध मे संयुक्त किसान मोर्चा का बयान

बीती रात दिल्ली हरियाणा बॉर्डर स्थित सिंघु बॉर्डर किसान मोर्चा स्थल से एक युवक का शव पुलिस बेरीकेट पर लटका हुआ पाया गया जिसे धारदार हथियारों से मारे जाने के साक्ष्य प्रथम दृष्टया प्राप्त हुए है। ...

खाप व्यवस्था और किसान आंदोलन ! बाबा बन्दा सिंह बहादुर को दहिया खाप का प्रणाम।।

किसान आंदोलन और सरकार की साजिशें दोनों आमने सामने अपनी अपनी चाले चल रही है लेकिन हरियाणा के जाट समुदाय की दहिया खाप ने बीजेपी द्वारा फुट डालो राज करो की नीति का उत्तर अनाज से भरी ट्रॉलियां भेज कर दिया।। ...

किसान आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा हरियाणा सरकार को खुली चुनौती। सरकार बैकफुट पर।

हरियाणा के विधायक देवेंद्र बबली द्वारा किसानों को गालियां दिए जाने और तीन किसानों की गिरफ्तारी के विरोध में आज हरियाणा के टोहाना में महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। ...

भारत सरकार द्वारा पारित तीन किसान विरोधी कानूनों के विरूद्ध आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा विरोध दिवस।

किसान आंदोलन के छह महीने पूरे होने के साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 26 मई को काला दिवस मनाया जा रहा है। ...

किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने के साथ ही सरकार की उदासीनता से एक बार फिर आंदोलन को नई ऊर्जा देने की कवायत

छह महीने से दिल्ली की सरहदों पर आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा आंदोलन को फिर से नई ऊर्जा देने की तैयारी ...

हमे भूल तो नहीं गए ? बेशक बच्चे भूल जाए लेकिन मां बाप दुख सहकर भी बच्चो के लिए कुर्बानियां करते हैं।

बेमौसम बरसात के कारण किसान आंदोलन स्थल पर परेशानियां बढ़ी लेकिन उससे ज्यादा दुखद सरकार, मीडिया और दिल्ली वासियों द्वारा नजरंदाज किया जाना है। ...

दिल्ली पुलिस एवम् निहंग साहेबान के बीच तीखी बहस के बाद विवाद सुलझा और दिल्ली पुलिस द्वारा निहंग बाबा जी की अपील स्वीकार करने का आश्वासन।।

गर्मियों के मौसम में घोड़ों को होने वाली परेशानी के कारण निहंग साहेबान द्वारा दिल्ली पुलिस से बेरीकेट्स हटाने की मांग पर विचार के लिए अधिकारी तैयार।। ...

अचानक आयी आंधी के कारण गाजीपुर बॉर्डर स्थित किसान आंदोलन स्थल पर कई टेंट तथा अस्थाई डेरों को नुकसान पहुंचा।

गाजीपुर बॉर्डर स्थित किसान आंदोलन स्थल पर तेज आंधी के कारण कई तम्बू तथा डेरे गिर गए । ...

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 10 अप्रैल शनिवार को कुंडली, मानेसर- पलवल हाई वे 24 घंटे के लिए काम करने की घोषणा।

आज कुंडली बॉर्डर पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शनिवार 10 अप्रैल को केएमपी पेरीफेरल रोड को 24 घंटे के लिए जाम करने की घोषणा की गई। ...

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में संसद के घेराव की घोषणा के साथ ही समझा जा सकता है कि आंदोलन एक बड़े मोड़ की ओर बढ़ गया है

कुंडली बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आयोजित विशेष प्रेस कांफ्रेंस में किसान नेता उग्राहां साहब ने सरकार को सीधी चुनौती देते हुए संसद घेराव की घोषणा कर दी। ...

किसान आंदोलन स्थल पर किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा गरमियों के सामने की तैयारी करते हुए स्टेट ऑफ़ आर्ट तथा क्रियेटिव उदाहरण प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

कड़कड़ाती सर्दी और बारिश के साथ बर्फीली हवाओं और जीत चुके किसान अब दिल्ली की सरहदों पर अपने मोर्चो से गर्मी को चुनौती देने के लिए भी तैयार है। ...

किसान आंदोलन को समर्थन देते देश विदेश के धरती पुत्र और इसमें एक और प्रतिष्ठित नाम जुड़ा है अमेरिका के गुरिंदर सिंह खालसा का।

दिल्ली की सरहदों पर चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देने हेतु एक ओर स्थानीय निवासी भी आते है तो विदेशो में रहने वाले भारतीय जिनकी आत्मा में भारत की मिट्टी की सौंधी खुशबू महकती है वो भी निरन्तर साथ खड़े होकर अपना समर्थन देते है। ...