किसान आंदोलन की बागडोर महिलाओ के हाथ में

Last Updated: Mar 09 2021 00:36
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दिल्ली की सरहदों पर किसान आंदोलन में आज धरती की बेटियां धरती पर संघर्ष में पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर न केवल नजर आई अपितु अहसास करा रही थी कि आवश्यकता पड़ने पर वो भी किसी से कम नहीं है। दिल्ली के बाहर तीनों सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन की बागडोर आज किसान परिवारों की माताओं, बहनों और बेटियो ने अपने हाथ में संभाली हुई थी। मंच संचालन से लेकर भाषण, कविता तथा गीत के माध्यम से न केवल भारत सरकार को चेतावनी देते हुए देखी जा सकती थी अपितु व्यवस्था एवं सुरक्षा का जिम्मा भी महिलाओ के हाथ में था। ऐसे किसी भी आंदोलन में सबसे मुश्किल कार्य मंच की व्यवस्था होती हैं क्योंकि बोलने वाले के शब्दो की चिंता भी प्रबन्धक को रहती हैं। आंदोलन के समर्थन में मर्यादित शब्दो के चयन के साथ साथ चिंता का कारण यह भी होता है कि कोई मर्यादा से बाहर अनुचित शब्दो का उपयोग न कर दे। वैसे भी गत रात कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा कुंडली बॉर्डर पर गोलियां चलाने के कारण स्थिति चिंता पैदा करने वाली थी। लेकिन सभी स्थानों पर महिलाओ ने सफलता पूर्वक अपना दायित्व पूर्ण किया और दुनियां को अहसास करा दिया कि आवश्यकता पड़ने पर भारत के ग्रामीण परिवेश की महिलाए भी किसी से कम नहीं हैं। गाजीपुर बॉर्डर पर मुख्यता उत्तर प्रदेश से माताएं हरे दुपट्टे के साथ सरकार को चेतावनी देती दिखाई दी तो टिकरी बॉर्डर पर रंग बिरंगे पारम्परिक वस्त्रों में हरियाणवी लोकगीत भी सुनाई दिए, लोकगीतों में मीठी गालियां भी मंच से गीतो में सुनाई दे रही थी। कुंडली बॉर्डर की महिलाओ में पंजाबियत की झलक और पीले रंग के लहराते दुपट्टे अहसास करा रहे थे कि प्रकृति ने खुद अपनी बेटियो के चोले पीले रंग से रंग कर भगत सिंह की माताओं को भेज दिया हो। नई पीढ़ी की पढ़ी लिखी बच्चियों के अतिरिक्त कई महिला खिलाड़ी भी इस आयोजन में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही थी। इस अवसर पर NewsNumber.Com की ओर से ग्राउंड ज़ीरो पर सभी सदस्यों में केवल महिलाओ को जिम्मेदारी सौंपी गई थी जिसमे कैमेरा भी महिलाओ के हाथ में था जिसे विशेष रूप से सभी ने सराहा।