महिला दिवस और पंजाबी संस्कृति में महिलाओं का स्थान

Last Updated: Mar 08 2021 09:52
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है और इस अवसर पर सब अपनी मानसिकता तथा सोच के मुताबिक मां से लेकर बेटी तक महिलाओ को आदर सम्मान पेश करते हैं। पहली बार महिला दिवस 1909 में अमेरिका में मनाया गया फिर 8 मार्च को ही रूस में महिलाओ ने ज़ार के विरूद्ध आंदोलन किया और जनता ने जारशाही को उखाड़ फेंका। इसी कड़ी में महिलाओं की बहादुरी की मिसाल ईरान में भी मिलती हैं जब रज़ा शाह पहलवी के विरूद्ध गोद में बच्चे लेकर सड़को पर उतर आई और सिपाहियों ने अपनी बंदूके नीचे कर ली। पंजाब की पावन धरती से भी याद करने लायक महिलाओं की सूची बहुत लंबी है जिसमे कुछ मैथॉ लॉजी हो सकती हैं लेकिन हम हकिकी माताओं को याद करते हैं। निसंदेह माता गूजरी जैसा दूसरा चरित्र न हुआ है न होगा लेकिन माता भागो भी युद्ध और विजय के प्रतीक के रूप में स्वयं में अकेला उदाहरण हैं। लोहड़ी पर्व पर हम अक्सर माता लद्धी को भूल जाते है जिसने दुल्ला भट्टी के पिंडी भट्टियां आने तक अकबर की सेना से लोहा लिया। रहस्यवाद और सूफीज्म की मिसाल के रूप में हीर है तो प्रेम के लिए जान कुर्बान करने वाली सोहनी भी है और शशि भी मिलती हैं। लोकगीतों को जीवित रखने के लिए प्रकाश कौर जी तथा उनकी बहन सुरिंदर कौर जी के साथ साथ उनकी बेटी तथा नवासी सुनयना को भी याद रखना चाहिए तथा भारत, पाकिस्तान से बाहर सुदूर कनाडा में जस्टिस पलविंदर कौर शेरगिल को भी याद रखना चाहिए जिन्होंने दस्तार सजा कर अपनी संस्कृति से समझौता नहीं किया। महिला दिवस पंजाब की धरती पर सदियों से चली आ रही परम्परा का हिस्सा है और मेरे जैसे बेटे के लिए रोज मां की चप्पलें खाने से शुरू होता था लेकिन इतिहास में एक भी सती होने का उदाहरण पंजाब की भूमि से नहीं मिलता। तभी तो धन गुरु नानक देव ने संदेश दिया था "सो को मंदा आखिये जिन जन्मे राजान"