किसान आंदोलन के सौ दिन और दिल्ली की सरहदों पर आंदोलनकारियों की एक लंबे समय तक धरने की तैयारियां।

जून 2020 देश करोना के कारण लॉक डाउन की स्थिति में था, सभी कार्य व्यवहार एवम् दफ्तर बंद थे लेकिन भारत सरकार ने अध्यादेश जारी करते हुए तीन बिल लागू कर दिए जिन्हे किसान बिल का नाम दिया गया बेशक किसान नेताओ द्वारा इन्हे कॉरपोरेट समर्थक कानून बताया जाता हैं। पंजाब के किसानों को इन बिलों से आपत्ति हुई और विरोध शुरू हो गया। इसी बीच संसद से बिल पास करा दिए गए बेशक उसमे भी विवाद रहा। पंजाब और हरियाणा के किसानों की आवाज़ को जब कोई महत्व नहीं दिया तो पंजाब के सभी किसान संगठनों ने दिल्ली आकर धरना देने का निश्चय किया और 26 नवम्बर का दिन निश्चित कर दिया गया। 25 नवम्बर को किसानों के जत्थे अपने ट्रैक्टर ट्रॉलियों के साथ दिल्ली की ओर चल पड़े लेकिन हरियाणा सरकार ने उन्हें रोकने के लिए सड़के खोदने से लेकर सभी जायज़ नाजायज तरीके अपनाए। हरियाणा सरकार के अवरोधों को तोड़ते हुए अंततः हज़ारों किसानों का आंदोलकारी रेला दिल्ली सीमा तक पहुंचने में कामयाब रहा बेशक उससे आगे उन्हे बढ़ने नहीं दिया गया और किसानों ने भी टकराव को छोड़कर दिल्ली हरियाणा बॉर्डर पर धरना शुरू कर दिया। 26 जनवरी से लेकर पथराव और मुकदमों तक के बहुत से पड़ाव आए, सरकार द्वारा कभी पानी की सप्लाई रोक दी गई कभी बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई कभी फोन और इंटरनेट बन्द कर दिए गए लेकिन किसानों का हौसला नहीं टूट पाया और धरना चलते हुए "सौ" दिन गुजर गए। देश विदेश से किसानों को मिलते समर्थन से सरकार के माथे पर पसीना आना स्वाभाविक था लेकिन फिर भी तंत्र को उम्मीद थी कि समय के साथ किसान थक कर अपना आंदोलन वापिस ले लेंगे और अपने घरों को वापिस लौट जाएंगे। इसी संदर्भ में सरकार समर्थित मीडिया ने प्रचार प्रारम्भ कर दिया कि आंदोलन समाप्ति की ओर है तथा किसान अपने घरों को लौट रहे हैं। वास्तविकता की पड़ताल के लिए NewsNumber.com की टीमें आज प्रदर्शन स्थल पर पहुंची। किसानों से बातचीत के बाद अहसास हुआ कि आंदोलनकारियों का न केवल हौसला बुलन्द है अपितु सभी एक लम्बी लड़ाई के लिए मानसिक रूप से भी तैयार है। सर्दी, बारिश झेल चुके प्रदर्शन कारियो ने अब गरमी से भी मुकाबला करने की ठान ली है जिसका सबूत सभी लंगर सेवा स्थलों में घूम रहे पंखों ने दिया। आने वाले समय के लिए कूलर और अपने बोरिंग के साथ पानी की व्यवस्था भी नजर आईं। दो ट्रॉली ऐसी भी थी इन्होंने सोलर सिस्टम के साथ एसी लगाए हुए थे। यद्धपि कुछ भीड़ कम थी लेकिन ट्रॉलियों के बसे गांव कम नहीं हुए हैं हालांकि सर्दी के कारण लगाए गए टेंट हाउस अवश्य कम थे क्योंकि उनकी जरूरत नहीं रही। गुरु के लंगर आज भी उतनी ही संख्या में उसी श्रद्धा भाव से संगत की सेवा कर रहे हैं और बिना किसी भेदभाव के लंगर सेवा के लिए अगले कई महीनों तक के लिए तैयार हैं। टिकरी बॉर्डर पर हरियाणा के निकटवर्ती गांव वासियों को पंजाब के किसानों द्वारा और अधिक आटा, दाल न भेजने की प्रार्थना करते हमने स्वयं देखा। किसानों का विशेषकर लंगर सेवा करने वालो का बार बार यह कहना कि वो केवल निमित्त मात्र है करने वाला तो कार्णहार हैं किसी को भी इनकी भावनाओ के सामने नतमस्तक होने के लिए मजबूर कर देता है। 6 मार्च को पेरीफेरल रोड ब्लॉक और 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाएगा। एक ओर तो सरकार की ज़िद है तो दूसरी ओर किसानों की अस्मिता और जमीन बचाने की जंग है। देखते हैं कि इस महाभारत में धर्म की विजय कब होगी

दिल्ली पुलिस एवम् निहंग साहेबान के बीच तीखी बहस के बाद विवाद सुलझा और दिल्ली पुलिस द्वारा निहंग बाबा जी की अपील स्वीकार करने का आश्वासन।।

गर्मियों के मौसम में घोड़ों को होने वाली परेशानी के कारण निहंग साहेबान द्वारा दिल्ली पुलिस से बेरीकेट्स हटाने की मांग पर विचार के लिए अधिकारी तैयार।। ...

अचानक आयी आंधी के कारण गाजीपुर बॉर्डर स्थित किसान आंदोलन स्थल पर कई टेंट तथा अस्थाई डेरों को नुकसान पहुंचा।

गाजीपुर बॉर्डर स्थित किसान आंदोलन स्थल पर तेज आंधी के कारण कई तम्बू तथा डेरे गिर गए । ...

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 10 अप्रैल शनिवार को कुंडली, मानेसर- पलवल हाई वे 24 घंटे के लिए काम करने की घोषणा।

आज कुंडली बॉर्डर पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शनिवार 10 अप्रैल को केएमपी पेरीफेरल रोड को 24 घंटे के लिए जाम करने की घोषणा की गई। ...

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में संसद के घेराव की घोषणा के साथ ही समझा जा सकता है कि आंदोलन एक बड़े मोड़ की ओर बढ़ गया है

कुंडली बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आयोजित विशेष प्रेस कांफ्रेंस में किसान नेता उग्राहां साहब ने सरकार को सीधी चुनौती देते हुए संसद घेराव की घोषणा कर दी। ...

किसान आंदोलन स्थल पर किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा गरमियों के सामने की तैयारी करते हुए स्टेट ऑफ़ आर्ट तथा क्रियेटिव उदाहरण प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

कड़कड़ाती सर्दी और बारिश के साथ बर्फीली हवाओं और जीत चुके किसान अब दिल्ली की सरहदों पर अपने मोर्चो से गर्मी को चुनौती देने के लिए भी तैयार है। ...

किसान आंदोलन को समर्थन देते देश विदेश के धरती पुत्र और इसमें एक और प्रतिष्ठित नाम जुड़ा है अमेरिका के गुरिंदर सिंह खालसा का।

दिल्ली की सरहदों पर चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन देने हेतु एक ओर स्थानीय निवासी भी आते है तो विदेशो में रहने वाले भारतीय जिनकी आत्मा में भारत की मिट्टी की सौंधी खुशबू महकती है वो भी निरन्तर साथ खड़े होकर अपना समर्थन देते है। ...

होली के रंग, किसानों के संग ! वैसे तो त्योहारों की खुशी अपने परिवारों के साथ अधिक होती हैं लेकिन विपत्ति काले मर्यादा न अस्ति को मानते हुए किसान आंदोलनकारियों ने धरना स्थल पर ही होली उत्सव मनाया।

भारत उत्सवों और तीज त्यौहारों का देश है और ऐसे में होली को विशेष दर्जा केवल इसलिए दिया जाता हैं क्योंकि एक ओर तो सर्दी की विदाई होती हैं तो दूसरी ओर लहलहाती फसलें किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए पुकार रही होती हैं। इस वर्ष की होली किसानों के बीच, किसानों के साथ। ...

किसान आंदोलन कारियो द्वारा भारत बन्द के कारण देश भर से बन्द की सफलता या आंशिक प्रभाव !

26 मार्च संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा भारत बंद का आहवान किया गया जिसे जनता के अतिरिक्त विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी समर्थन दिया। इसके परिणाम स्वरूप देश के अधिकांश हिस्सों में शांति पूर्वक बन्द रखा गया। रास्ते जाम किए गए तथा रेले हैं गई। ...

किसान आंदोलन का बदलता स्वरूप और लगातार चलता डेडलॉक क्या किसी आने वाले तूफान की आशंका हो सकता है ?

दिल्ली की सरहदों पर किसानों का धरना फिर सरकार से बातचीत और ट्रेक्टर परेड से लेकर लाल किला तथा अब राज्यो मे होने वाले चुनावों में किसान नेताओ की महापंचायत। इन सब के साथ बातचीत टूटे हुए भी दो महीने बीत चुके हैं और सरकार खामोश हैं। क्या यह खामोशी किसी तूफान का संकेत है ? ...

क्या दिल्ली की सरहदों पर चल रहा किसान आंदोलन अपनी समाप्ति की ओर है ? क्या लगातार चार महीने से मोर्चा लगाकर बैठे किसानों की थककर वापसी हो रही है ? क्या सरकार इस विश्व प्रसिद्ध आंदोलन को समाप्त करने की चालों में कामयाब हो रही हैं?

भारत के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जिसमे से अधिकांश चैनल गोदी मीडिया का खिताब प्राप्त कर चुके है लगातार किसान आंदोलन को असफल और समाप्ति की ओर बता रहा है। News Number की टीम ने हालात का विश्लेषण किया जिसकी रिपोर्ट प्रस्तुत है। ...

23 मार्च शहीद भगत सिंह और उनके साथियों की शहादत को सलाम करते हुए चौथे महीने में दाखिल हो चुके किसान आंदोलन कारी फिर से इन्कलाब जिंदाबाद का नारा बुलन्द करेंगे

23 मार्च का दिन जब हिंदुस्तान की आज़ादी की मशाल में तीन रण बंकुरो ने हंसते हंसते अपनी कुर्बानी दे दी थी। उन्ही के सम्मान और सत्कार में दिल्ली की सरहदों पर मोर्चा लगाकर बैठे किसानों ने व्यापक रूप से उनकी कुर्बानियों को याद करने का निर्णय लिया है। ...

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली की सरहदों पर चल रहे किसान आंदोलन की बागडोर महिलाओ के हाथ में देखकर महसूस किया जा सकता था कि माता भागो प्रत्येक नारी में जिंदा है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और इस अवसर पर समाज का कथित उच्च वर्ग एक ओर तो सेमिनार तथा समारोह आयोजित कर रहा था वहीं दूसरी ओर किसान परिवारों की माताएं बहनें एवम् बेटियां घरों से निकल कर आंदोलन का हिस्सा बनी हुई थी। धरती की बेटियां धरती पर संघर्ष करती हुई नजर आईं ...

किसान आंदोलन की आज की कड़ी में दिल्ली के चारो ओर विभिन्न राज्यो को जोड़ने वाले केएमपी ( पेरीफेरल रोड ) पर सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चक्का जाम किया जा रहा है।

किसान आंदोलन चलते हुए सौ दिन पूरे हो चुके है लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। किसानों की ओर से सरकार का ध्यान आकर्षित करने एवम् अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है जिसमे आज पांच घंटे के लिए पेरीफेरल रोड पर चक्का जाम किया जा रहा है। ...

संत और शुभ विचार किसी जाति धर्म विशेष के नहीं अपितु सम्पूर्ण मानवता के लिए होते है जिसकी झलक आज कुंडली बॉर्डर पर दिखाई दी।

भारत सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सरहदों पर चल रहा आंदोलन अपने चौथे महीने में प्रवेश कर चुका है और लगता है कि किसानों ने इसे अपने जीवन का हिस्सा समझकर आंदोलन तीर्थ को अपना दूसरा घर बना लिया है ...

पगड़ी संभाल जट्टा, पगड़ी संभाल ओए लूट गया माल तेरा, लूट्ट गया माल ओए।।

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा जारी प्रेस नोट में अन्य विषयों के अतिरिक्त 23 फ़रवरी को "पगड़ी संभाल जट्टा" दिवस के रूप में मनाने का निश्चय किया गया है। ...