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Ayesha Banu ended her life after recording a video. Her father said that she was harassed by her in-laws for dowry and was eventually sent to her parents’ house by her husband. Arif Khan has been arrested and a case of abetment to suicide has been registered against him.

बद से बदनाम बुरा और जब किसी सरकार पर संस्थानों और शक्तियों के दुरुपयोग के आरोप लगने लगे तो उसके नेता का इकबाल खत्म हो जाता है।

भारत या कोई भी लोकतांत्रिक देश हो वहां सरकारों के अतिरिक्त अन्य संवैधानिक संस्थाएं भी होती हैं और व्यवस्था स्थापित करने के लिए कई स्वतंत्र विभाग भी होते है जिससे सभी के सभी काम ईमानदारी से चलते रहे एवम् जम कल्याण तथा विकास कार्यों में कोई बाधा न हो। ...

कूटनीति, मोदी सरकार और दुशांबे सम्मिट ! SCO बैठक का विश्लेषण एवम् भारतीय प्रधानमंत्री का संबोधन।

आज समाप्त होने वाली शंघाई सहयोग संगठन की शिखर मीटिंग में भारतीय प्रधानमन्त्री द्वारा वर्चुयल संबोधन प्रसारित किया गया। संगठन एवम् कूटनीति का अपने विचारो के अनुसार विश्लेषण करने का प्रयास। ...

कनाडा और भारत दुनियां के दो ऐसे देश है जहां बहुत सी सभ्यताएं बसती हैं और साथ साथ चलती हैं दूसरी समानता यह है कि पंजाबियों ने अपने खान पान से सबको प्रभावित किया है।

भारत बेशक विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों का संगम है लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि भारत ( विशेषकर गौ पट्टी क्षेत्र ) को खाने की विविधता और स्वाद पंजाब ने ही दिया है। ...

गणपति बप्पा मोरया । आजकल भारत में गणेश उत्सव की धूम मची हुई है जिसे आज़ादी के संग्राम के समय पब्लिक मीटिंग्स के लिए बहाने के तौर पर शुरू किया गया था।

गणपति बप्पा मोरया । आजकल भारत में गणेश उत्सव की धूम मची हुई है जिसे आज़ादी के संग्राम के समय पब्लिक मीटिंग्स के लिए बहाने के तौर पर शुरू किया गया था। लेकिन कालांतर में यह धार्मिक आयोजन और आस्था का अटूट अंग बन गया। क्योंकि दक्षिण एशिया की संस्कृति में भावनात्मकता का पुट अधिक होता है और सदियों तक आश्रित रहने वाली नस्लों को हमेशा किसी चमत्कारिक लाभ की उम्मीद रहती हैं इसीलिए पीर फकीर से लेकर विभिन्न आस्थाओं का बोलबाला है। गणेश चतुर्थी जो कभी महाराष्ट्र में मनाई जाती थी अब उत्तर भारत के अधिकांश बड़े शहरों में मनाया जा रहा है। यहां तक कि पंजाबी समुदाय भी अब गणेश प्रतिमा स्थापित करने लगा है बेशक गणपति के पीछे का दर्शन ना जानते हो। ...

सुधा मूर्ति ! यदि इंफोसिस फाउंडेशन का नाम सुना होगा तो उसकी चेयर पर्सन को भी जरूर जानते होंगे ! आज उनके पिता को जानिए।

इंफोसिस फाउंडेशन भारत की शान कहीं जा सकती और इसकी चेयर पर्सन मैडम सुधा मूर्ति की समाज सेवा एवम् विद्धता को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है लेकिन इसके पीछे निसंदेह उनके पारिवारिक संस्कार है जो उन्हे उनके पिता से मिले होंगे। मैडम सुधा मूर्ति के पिता डॉक्टर रामचंद्र कुलकर्णी के जीवन की एक घटना। ...

पंजाबी भाषा की फिल्मों में नानक नाम जहाज है का रेकॉर्ड आज तक कायम है और उसके साथ ही "पासा पुट्ठा पै गया" डायलॉग भी याद होना चाहिए।

हिन्दी सिनेमा के अतिरिक्त पंजाबी भाषा में भी कई फिल्में बनी और उस कड़ी में नानक नाम जहाज है नामक फिल्म की सफलता ने जो झंडे फहराए वो आज तक किसी दूसरी फिल्म के भाग्य में नहीं आया। उस फिल्म के मोहम्मद रफी की आवाज़ के गाए गए शब्द आज भी आत्मिक सुख देते हैं लेकिन एक चरित्र और याद आता है जिसका "पासा पुट्ठा पै गया" बोलना कभी नहीं भूलता। ...

जिस प्रकार प्रत्येक शहर की पहचान के साथ किस न किसी भवन से बताई जाती है वैसे ही दिल्ली को कुतुब मीनार और लोट्स टैम्पल से पहचाना जाता है।

प्रत्येक शहर की पहचान के साथ वहां के किसी न किसी भवन को जोड़कर देखा जाता है जैसे आगरा को ताजमहल और दिल्ली को कुतुब मीनार तथा लोटस टैंपल से पहचाना जाता है। लेकिन लोटस टैंपल देखने जाने वाले विजीटर्स के मन में यह विचार अवश्य आता होगा कि यह कैसा मन्दिर है जिसमे देखने के लिए कुछ भी नहीं है क्योंकि यह बहाई संप्रदाय का पूजा स्थल है। बहाई संप्रदाय के सम्बन्ध मे मनीष सिंह की रिपोर्ट। ...

Dismentaling Global Hindutva ! अमेरिका में 50 विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विवाद क्यो हुआ ?

10 सितम्बर से 12 सितम्बर तक तीन दिन का एक वर्चुअल सम्मेलन आयोजित किया गया जिसे C oHNA ने Dismentaling Global Hindutva के नाम से आयोजित किया। वाशिंगटन पोस्ट तथा अन्य सभी अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इस सम्मेलन पर व्यापक रिपोर्टिंग करते हुए कई आलेख प्रकाशित किए यद्धपि भारत में इसकी चर्चा भी नहीं हुई। ...

जुल्फिकार अली भुट्टो! दक्षिण एशिया का ऐसा राजनेता जिसके नाम पर आज भी राजनीति होती हैं बेशक उसकी सोच से कोई सहमत हो या न हो।

जिवें सिंध ते जीवें भुट्टो के नारे के साथ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी आज तक राजनीति करती हैं बेशक जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी पर लटका दिया गया था और बीबी बेनजीर भुट्टो को शहीद कर दिया गया था। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि पाकिस्तान टूटने के बाद अपने देश को भुट्टो ने नई दिशा दी और मनोबल टूटने नहीं दिया। ...

हिन्दी दिवस! भाषा की आड में संस्कृति बदलने की कवायद।

14 सितम्बर जिसे हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है और इससे अधिक हास्यास्पद क्या होगा कि वो सभी हैप्पी हिंदी डे बोलने लगते है जिन्हे उन्यासी और नवासी का अंतर भी मालूम नहीं होता तथा जो अपने बच्चो को कॉन्वेंट स्कूल में दाखिला दिलवाने के लिए जमीन आसमान एक किए रहते है बेशक वहां हिंदी बोलने की सख्त मनाही हो। ...

क्रान्ति होती हैं, जनता द्वारा की जाती है लेकिन उस क्रांति को खड़ा करने और लक्ष्य तक पहुंचाने के पीछे जनता नहीं होती।

क्रांतियां होती हैं और आज के अधिकांश देशों के निर्माण के साथ किसी न किसी क्रांति का नाम जुड़ा हुआ है तथा साथ ही क्रांति लाने वाले नेता का भी। किन्तु उन क्रांतियों के पीछे कोई सार्थक उद्देश्य रहे थे और उनका नेतृत्व किसी सक्षम व्यक्ति के हाथ में था। परन्तु यदि भीड़ के लिए कोई अराजकता खड़ी करनी हो तो योजनाकार क्या करते हैं ? ...

पीचे देखो पीचे , पीचे तो देखो उधर भी आग लगी है और उसकी चिंगारी बी नुकसान पहुंचा सकती है।

एक महीने से अधिक हो चुका है जब काबुल से तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ गनी देश से भाग गए थे और तालिबान ने काबुल फतेह कर लिया था। उसके बाद से आजतक भारतीय मीडिया एवम् विचारक केवल अफगानिस्तान केंद्रित खबरे तथा विश्लेषण कर रहे है। ...

9/11 जिसे आतंकी घटना से लेकर यूएस अंडर अटैक बोला गया एक कभी ना सुलझने वाली उलझन है।

बीस साल पहले अचानक दुनियां भर को दहलाने वाली खबरे चलने लगी और उसे इतिहास 9/11 के नाम से जानती है, इसी घटना के बाद इराक़ हमला हुआ, अफगानिस्तान पर कार्पेट बंबिंग हुई और नाम मिला वार अगेंस्ट टेरर किन्तु जो सवाल खड़े हुए वो आज भी जवाब मानते है।। ...

हम बेईमान क्यो कहलाते है ? क्योंकि हमारे नेता, हमारे अधिकारी और हम खुद बतौर एक वोटर, ईमानदार नहीं है।

यकीनन किसी भी भारतीय के मन में अपने इर्दगिर्द के माहौल को देखकर यह सवाल पूछने का मन करता होगा " हम बेईमान क्यों है" ...