करोना की दवा के नाम पर फर्जीवाड़ा या भूल !

Last Updated: Feb 22 2021 18:34
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अचानक विश्व को करोना ( Covid -19 ) नामक महामारी ने अपनी गिरफ्त में ले लिया और विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) द्वारा स्पष्ट कर दिया गया कि अभी न इसका कोई उपचार उपलब्ध है और न ही प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए कोई वैक्सीन तैयार हुई हैं। ऐसे में बाबा रामदेव प्रेस कांफ्रेंस करते है और दावा करते है कि उनके संस्थान पातंजली आयुर्वेद ने कोरॉनिल नामक एक दवा बनाई है जो इस बीमारी मे बहुत कारगर है लेकिन जब विश्व स्तर पर इस दवा की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए जाते है तो अगले ही दिन बाबा रामदेव अपनी बात से यू टर्न लेते हुए स्पष्ट करते है कि उन्होंने अपनी कथित दवा को उपचार के लिए नहीं बताया था और लोगो को समझने में कुछ गलतफहमी हुई हैं ( सभी वीडियो कई जगह उपलब्ध है ) शायद इन्हे अंदाज़ा नहीं था कि इनके प्रचार को विश्व कितने नकारात्मक दृष्टिकोण से लेगा और आपत्तियां दर्ज होंगी और उससे पहले ये भारी तादाद में दवा का निर्माण कर चुके थे। अचानक करोना के बढ़ते प्रभावों के बीच परसो एक बार फिर बाबा रामदेव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी कथित कोरॉनील दवाई पुनः लॉन्च की तथा इस बार भारत सरकार के दो केंद्रीय मंत्री भी उनके साथ बैठे थे। इनमे से एक तो भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन खुद पेशे से डॉक्टर भी है। रामदेव द्वारा दावा किया गया कि उनकी दवा को करोना के उपचार हेतु विश्व स्वास्थ्य संगठन से मान्यता भी प्राप्त हुई हैं जिसे पीछे लगे बैनर पर देखा जा सकता है और भारत के अधिकांश मीडिया हाउसेज ने बिना पुष्टि किए इसे प्रसारित भी कर दिया। रामदेव और उनकी दवा के प्रचार को तुरन्त संज्ञान में लेते हुए WHO के साउथ ईस्ट विभाग ने ट्वीट करके इसका खंडन किया कि उनके संस्थान द्वारा ऐसी कोई मान्यता या प्रमाणपत्र जारी किया गया है। अक्सर व्यापार के लिए झूठ बोलकर फर्जी दावे किया जाना अब सामान्य व्यवहार बनता जा रहा है लेकिन भारत सरकार द्वारा इस प्रकार के झूठ का साथ देना तो निसंदेह भारत सरकार की साख पर बट्टा लगाता है। यद्धपि बिना किसी जांच और प्रामाणिक प्रयोग के किसी दवा का जारी करना न केवल पाप है अपितु महामारी एक्ट के अंतर्गत अपराध भी है वैसे भी भारत का संविधान वैज्ञानिकता को बढ़ावा देने का समर्थन करता है बेशक अभी भी भारत के पिछड़े इलाकों में लोग झाड़ फूंक से बीमारी दूर करने में विश्वास रखते हो या मानसिक रोगी को ऊपरी हवा के असर में बता कर फर्जी बाबाओं और तांत्रिको के हाथ बर्बाद होते हो। आशा की जानी चाहिए कि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा इस विषय पर स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा और सार्वजनिक रूप से यदि मंत्री जी अथवा किसी भूलवश सम्बन्धित अधिकारियों द्वारा लापरवाही हुई हैं तो क्षमा मांगी जाएगी क्योंकि यदि यह दावा झूठा साबित हुआ है तो यह मानवता के विरूद्ध एक अपराध है।