राजस्थान सरकार का महिला विरोधी विज्ञापन

Last Updated: Feb 22 2021 17:54
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क्या लिपस्टिक और मेकअप किसी सरकार या सरकार के सूचना विभाग के अधिकारियों की नजर में असमाजिक कार्य है ? क्या किसी महिला को उसकी मर्जी से बनाव श्रृंगार राजस्थान सरकार की नीतियों के विपरीत है या करोना महामारी फैलाने में सहायक ? कुछ ऐसे ही प्रश्न खड़े होते है जब राजस्थान सरकार के सूचना विभाग द्वारा जारी लोक उत्सव कार्यक्रम के विज्ञापन को देखते हैं। 24 से 27 फ़रवरी तक आयोजित इस समारोह में आमन्त्रित करने तथा जनता को जानकारी देने के लिए एक विज्ञापन जारी किया गया है। इस छोटे से वीडियो की परिचय चित्र ( थंबनेल ) में लिखा हुआ है कि लिपस्टिक और मेकअप से करे परहेज़, मास्क लगाकर रहे। साथ ही चित्र में एक राजस्थानी महिला को दिखाया गया है जिसके हाथ में लिपस्टिक है। पहली नजर में बताया जा सकता है कि यह करोना से बचाव हेतु सामाजिक चेतना जागृत करने के लिए बनाया गया विज्ञापन है किन्तु यदि सम्बन्धित अधिकारियों की मानसिकता को ध्यान से सोचा जाए तो अहसास होता है कि 21 वीं सदी में भी उनके लिए महिला एक सजावटी वस्तु है और उसके द्वारा मेकअप या अच्छा दिखना इन्हे मंजूर नहीं है। कोई महिला खुद को अच्छा महसूस करने के लिए यदि लिपस्टिक लगाती है या श्रृंगार करती हैं या अपनी पसंद के कपड़े पहनती है तो उस पर आपत्ति करना या उसको विज्ञापन की वस्तु बना देना न केवल निंदनीय है अपितु घोर पाषाण कालीन मानसिकता को भी इंगित करता है। मास्क के लिए जागृति अभियान और महिला की लिपस्टिक दोनों एक दम विरोधाभाषी विषय है। इस विज्ञापन से ऐसा लगता है कि कोई भी महिला यदि लिपस्टिक लगाती हैं तो उसके पीछे महिला द्वारा खुद का प्रदर्शन करना होता है जिससे राजस्थान सरकार को आपत्ति है। क्या हम फिर से जंगली सभ्यता की ओर तो नहीं जा रहे। इस सम्बन्ध मे कई नामचीन महिला पत्रकारों ने भी इसे महिला विरोधी मानसिकता बताते हुए अपना रोष प्रकट किया है।