भारत सरकार द्वारा क्रीफ्टो करंसी के सम्बन्ध मे अहम घोषणा और शीघ्र ही भारतीय क्रिफ्टो करंसी जारी करने की स्मभवना के साथ ही अन्य किसी भी डिजिटल करेंसी के लेनदेन पर रोक।

विश्वयुद्धों के बाद दुनोलियान को किसी न किसी नए परिवर्तन और नियमो से बांधकर चलाने के लिए प्रणाली विकसित होती रही है। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद लीग ऑफ नेशन्स बनी तथा उस्मानिया सल्तनत एवम् राशिद खलीफा शासन पद्धति को समाप्त होना पड़ा। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा का गठन किया गया, ब्रिटिश साम्राज्य को अपने उपनिवेश आज़ाद करने पड़े तथा पेपर करेंसी के साथ साथ आधुनिक बैंकिंग प्रणाली, बीमा सेक्टर एवम् डॉलर्स के वर्चस्व का उदय हुआ। संसार दो हिस्सो में बांट दिया गया जिसमे एक कम्युनिस्ट विचारधारा थी तो दूसरी पूंजीवादी व्यवस्था अधिकांश बड़े देश भी दो हिस्सो मे बट गए बेशक कल तक एक रहे हो लेकिन नई व्यवस्था में विरोधी ही बन गए चाहे भारत पाकिस्तान हो, जर्मन हो या कोरिया। उसके बाद सोवियत संघ के पतन के बाद चीन नई आर्थिक ताकत के रूप में उभरा और वेस्टर्न पावर्स इसका मुकाबला नहीं कर पाई क्योंकि मुद्रा के वैश्विक मूल्यों में बहुत अंतर था। कह सकते हैं कि किसी भी वजह से यूरो तथा डॉलर्स की कीमत इतनी अधिक हो गई जिसे करेक्ट करना जरूरी था। इससे पहले ही नई विश्व व्यवस्था तथा नई बैंकिंग एवम् मुद्रा नीति के सम्बन्ध में विभिन्न थिंक टैंक ब्लू प्रिंट और बुनियाद तैयार करने लगे। करोना महामारी आई जिसके चलते विश्व की आर्थिक गतिविधियों पर विराम लग गया, लगभग सभी देशों की अर्थवयवस्थाओं को नकारात्मक असर देखना पड़ा लेकिन विजन 2030 और SDG को लक्ष्य बनाकर सरकारें अपना काम करती रही। इसी कड़ी में क्रीफटो करेंसी का आगाज़ और धीरे धीरे पेपर करेंसी तथा बिना लेखा जोखा के लेनदेन पर रोक भी अहम हिस्सा हैं। क्रिफटो करेंसी की शुरुआत सबसे पहले बिटकॉइन के रूप में मानी जा सकती हैं जिसे 2009 में जापान के कम्प्यूटर विशेषज्ञ ने जारी किया था और आज लगभग 1000 अलग अलग वर्चुयल करेंसी प्रचलन में हैं। बिटकॉइन में टेस्ला कम्पनी द्वारा निवेश किए जाने की घोषणा के साथ ही इस मुद्रा को वैधानिक तौर पर स्वीकृति मिलनी शुरू हो गई थी। 2019 में भारत सरकार द्वारा बिटकॉइन पर पाबन्दी लगा दी गई थी और इसके लेनदेन पर दस साल तक की सजा का प्रावधान था लेकिन 2020 में भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा लगाई गई पाबन्दी को निरस्त कर दिया। आज वित्त राज्य मंत्री ने अहम घोषणा करते हुए बताया कि शीघ्र ही भारतीय रिजर्व बैंक अपनी डिजिटल करेंसी जारी करेगा तथा भारत में किसी प्रकार की भी अन्य डिजिटल करेंसी के प्रचलन पर न केवल रोक रहेगी अपितु इसे अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। सरकार द्वारा नई मुद्रा के साथ शायद नए नियम भी लागू किए जा सकते है। वर्तमान में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक संवैधानिक अधिकार प्राप्त संस्था है तथा इसमें सरकार एक सीमा से अधिक दखल नहीं दे सकती जिसमे नई करेंसी जारी करने से लेकर रिजर्व फंड निकालने तक की पाबन्दियां होती हैं। इन अड़चनों को भी दूर करने की कोशिश की जा सकती है क्योंकि अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर वापिस लाना फिलहाल बहुत कठिन लग रहा है। प्रत्येक स्थिति में कोई भी सरकार ग्लोबल बाज़ार से तालमेल रख कर चले यह उसकी मजबूरी होती हैं विशेषकर भारत जैसे विकासशील गरीब देश के लिए। निसंदेह एक समूह इस प्रकार के परिवर्तनों को विरोध भी करेगा और इसे असंवैधानिक करार देगा किन्तु सरकार के पास कोई विकल्प भी नहीं बचता।

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