किसान आंदोलन और ट्रैक्टर परेड के साथ जुड़े खबरों की खबर

दिल्ली में किसान आंदोलन कर रहे किसानों ने 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड निकालने की घोषणा की थी जिसके कारण आज कुछ चूक हुई और इसमें एक किसान को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। लगभग एक महीना पहले ही किसान मोर्चा लगाने वाले नेताओ ने घोषणा कर दी थी कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकाली जाएगी लेकिन भारत सरकार और प्रशासन को उम्मीद थी कि इस दौरान किसी भी प्रकार से आंदोलन समाप्त हो जाएगा और मोर्चे से किसान अपने घरों को लौट जाएंगे। शायद इसी अति आत्मविश्वास के कारण प्रशासन ने इसकी योजना नहीं बनाई और किसान नेताओ से तालमेल नहीं बनाया। केवल दो दिन पहले ही रूट प्लान बनाया गया और 12 घंटे पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं गई बातो से हटकर अलग से शर्तें लाद दी। किसान नेताओ के साथ तालमेल बना कर रैली का नक्शा और प्रबन्ध यदि पहले से तय होता तथा परेड में हिस्सा लेने आए युवकों को सेक्टर वाइज अनुशासित रखा जाता तो ऐसा नहीं होता। सुबह 8 बजे ही एक ग्रुप सिर्फ 55 ट्रैक्टर और कुछ समर्थको के साथ निर्धारित रास्ते से हटकर परेड निकालने पर अड गया जिसका दिल्ली पुलिस से पहले टकराव बॉर्डर से 10 किमी दूर हुआ। दिल्ली पुलिस को इस ग्रुप को बेरीकेट्स से पहले ही रोक देना चाहिए था लेकिन उसे मुकरबा चौक तक आने दिया गया और जब उन्होंने पुलिस से टकराव शुरू किया तो पुलिस ने पीछे हटकर उन्हे मनमर्जी करने दी। किसान नेताओ को जब पिछली रात ही इसकी जानकारी थी तो उन्हे और प्रशासन को इस गरम दल को मॉरल प्रेशर में लेकर उनका निर्णय बदलवाना चाहिए था। इसमें सबसे चर्चित घटना लाल किले पर निशान साहब का लगाना भी है जिसे कुछ लोग अलगाव वाद और पंजाबियों को शर्मिंदा करने के लिए कर रहे है जबकि यहां प्रस्तुत चित्रों में साफ है कि तिरंगे झंडे का कोई अपमान नहीं किया गया है बेशक यह हरकत समर्थन करने लायक नहीं है। लेकिन प्रशासन द्वारा इंटेलिजेंस रिपोर्टर्स के बावजूद लाल किले को कोर्डन ऑफ करके सुरक्षित न किया जाना भी सवालों के घेरे में आता है। सोशल मीडिया पर पंजाब के किसी फिल्मी कलाकार को लाल किले के वाक्ए के लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है और बीजेपी से उसकी नजदीकियों की फोटो भी वायरल की जा रही है। यदि यह सच है तो ज्यादा दुखद है। क्या इससे आंदोलन पर कोई प्रभाव पड़ेगा ? इस सवाल का जवाब सरकार भी तलाश रही होगी लेकिन प्रशासन और नीतियां बनाने वालो को पंजाबी समुदाय की मानसिकता को ध्यान में रखकर निर्णय लेने चाहिए क्योंकि अक्सर इतिहास में भी दबाव बनाने से आंदोलन भड़कते ज्यादा है कम नहीं होते। आज की परेड के दौरान एक युवक के शहीद होने पर हम दुख व्यक्त करते हैं और उम्मीद करते हैं कि आगे से आंदोलन पूर्णतः शांतमय रहेगा

राजनीति या इंसानियत ?

26 जनवरी को किसानों द्वारा निकाली गई ट्रैक्टर परेड में अपनी जान से हाथ धोने वाले युवक की अंतिम अरदास में श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा यूपी के रामपुर में शामिल हुई। ...

आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा उन पर लगाए गए अनर्गल अरोपो के जवाब में किसानों ने गणतंत्र दिवस पर तिरंगे झंडे के साथ दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकालने का निर्णय लिया और उसके लिए दिल्ली पहुंचने शुरू हो गए।

दिल्ली के चारो ओर किसान विरोधी कानूनों का विरोध कर रहे किसानों द्वारा गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के अंदर ट्रेक्टर रैली की बड़ी तैयारियां जोरों शोरों से की जा रही है। इसके लिए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में ट्रैक्टर्स का पहुंचना जारी है। ...