Loading the player...

एक पिता के लिए उसकी संतान उसका गर्व है उसका अहंकार है और संतान के लिए उसके पिता उसका आदर उसकी प्रेरणा बिना कहे पिता संतान की हर एक इच्छा समझ जाता है और उसे पूरी करने की चेष्टा करता है दूसरी और संतान सदैव प्रयास करता है अपने माता पिता को गर्वित करता है किन्तु यह बंधन एक स्थान पे आके टूट जाता है

Last Updated: Sep 21 2020 12:22
Reading time: 0 mins, 19 secs

एक पिता के लिए उसकी संतान उसका गर्व है उसका अहंकार है और संतान के लिए उसके पिता उसका आदर उसकी प्रेरणा बिना कहे पिता संतान की हर एक इच्छा समझ जाता है और उसे पूरी करने की चेष्टा करता है दूसरी और संतान सदैव प्रयास करता है अपने माता पिता को गर्वित करता है किन्तु यह बंधन एक स्थान पे आके टूट जाता है