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प्रेम विधाता की सबसे सूंदर कृति है .. परन्तु हर कृति को संभालना पड़ता है . अब इसी मूर्ति को देख लीजिये ..जब कलाकार ने इसे रचा .. तब यह बहुत सूंदर थी .. परन्तु इसके पश्‍चात् इसको संभाला नहीं गया .. इसके स्वामी ने इसकी देखभाल का कर्त्तव्य ठीक से नहीं निभाया .. और अब .. अब यह मूर्ति असुंदर लगने लग गयी है .. इसी प्रकार केवल कह देने से प्रेम प्रेम नहीं हो जाता .. इसके लिए आपको अपने कर्तव्यों को पूरा करना पड़ता है .. देश की रक्षा .. परिवार और संबंधियों की सुरक्षा .. संतान को संस्कार .. जीवनसाथी का आभार .. यह कर्त्तव्य जब तक नहीं निभाओगे .. प्रेम से दूर होते जाओगे .. यदि प्रेम का अमृत पाना है.. तो कर्त्तव्य की अंजलि बढ़ानी होगी .. और मन से कहना होगा .. राधे राधे ..

Last Updated: Aug 24 2020 12:19
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प्रेम विधाता की सबसे सूंदर कृति है .. परन्तु हर कृति को संभालना पड़ता है . अब इसी मूर्ति को देख लीजिये ..जब कलाकार ने इसे रचा .. तब यह बहुत सूंदर थी .. परन्तु इसके पश्‍चात् इसको संभाला नहीं गया .. इसके स्वामी ने इसकी देखभाल का कर्त्तव्य ठीक से नहीं निभाया .. और अब .. अब यह मूर्ति असुंदर लगने लग गयी है .. इसी प्रकार केवल कह देने से प्रेम प्रेम नहीं हो जाता .. इसके लिए आपको अपने कर्तव्यों को पूरा करना पड़ता है .. देश की रक्षा .. परिवार और संबंधियों की सुरक्षा .. संतान को संस्कार .. जीवनसाथी का आभार .. यह कर्त्तव्य जब तक नहीं निभाओगे .. प्रेम से दूर होते जाओगे .. यदि प्रेम का अमृत पाना है.. तो कर्त्तव्य की अंजलि बढ़ानी होगी .. और मन से कहना होगा .. राधे राधे ..