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मेरे आस पास यह वृक्ष || श्री कृष्ण वाणी || NewsNumber.Com

Last Updated: Aug 03 2020 12:49
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मेरे आस पास यह वृक्ष .. यह पौधे .. यह पुष्प .. देख रहे हैं आप .. है न सुंदर ? क्योंकि आप ने इन्हें  देखा है .. इसी प्रकार जब प्रेम की बात आती है .. लोग किसी का मुख स्मरण कर लेते हैं .. ऐसी आंखें .. ऐसी मुस्कान .. घने केश .. पर क्या यही प्रेम का अस्तित्व है ? नहीं .. यह उस शरीर का अस्तित्व है जिसे हमारी आँखों ने देखा .. और हम ने स्वीकार कर लिया .. परन्तु प्रेम .. प्रेम भिन्न है .. प्रेम उस वायु की भांति है जो हमें दिखाई नहीं देती .. पर वही .. वही हमें जीवन देती  है ..