क्या बिगड़ता अगर पहले चला देते ट्रेनें तो?

Last Updated: Jun 02 2020 12:41
Reading time: 1 min, 22 secs

सरकार ने सोशल डिस्टनसिंग के उल्लंघन होने के ख़तरे की दुहाई देकर देश भर में हवाई, रेल व सड़क मार्ग लंबे समय के लिए बंद रखे। सरकार का मानना था कि, ऐसा करने से कोरोना संक्रमण का खतरा कम हो जाएगा।

दोस्तों आज ज़मीनी हकीकत क्या है, बताने की ज़रूरत नहीं है, सब जानते हैं। अगर चैनलों पर चली खबरों को ही सच मान लिया जाए तो, इस समय के दौरान लाखों मज़दूरों को हज़ारों किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। भूख प्यास के चलते सैंकड़ों मज़दूर रास्ते में ही दम नहीं तोड़ गए होंगे, इस बात से भी कोई पूरे यकीन के साथ इनकार नहीं कर सकता।

जानकारों के अनुसार आज जब मज़दूर वर्ग का एक बड़ा हिस्सा अपने ठिकानों पर पहुंच चुका है तो सरकार ने गिरती आर्थिकता को संभालने के लिए, चाहे शर्तों पर ही पर, सारे मार्ग खोल दिये हैं।

आलोचकों के अनुसार, इतना सब करने के बावज़ूद ना ही कोरोना खत्म हुआ है और ना ही इसके फैलने का ख़तरा। इतनी पाबंदियां लगाने के बावज़ूद भी हमें वो कामयाबी हासिल नहीं हुई जितनी कि, हमने उम्मीद लगा रखी थी, पर मज़दूरों को इस नाकामयाबी की बड़ी कीमत ज़रूर अदा करनी पड़ी।

आलोचक सवाल करते हैं कि अगर, सरकार ने हवाई, रेल व सड़क मार्ग खोलने ही थे तो थोड़ा और पहले खोल देते कम से कम लाखों मज़दूरों को यह दिन तो न देखने पड़ते जो वह देखने को मजबूर हुए। सरकार सही फैसला सही वक्त पर ले लेती तो आज सैंकड़ों मज़दूर रास्ते में ही दम न तोड़ चुके होते, उनके बच्चे अनाथ होने से बच गए होते।

नोट: यह विचार लेखक के अपने निजी विचार हैं, NewsNumber इन विचारों के लिए ज़िम्मेदार नहीं है।