UGC ने जारी किया नया नियम, पढ़ाने के लिए टीचरों का पीएचडी होना जरूरी

Bhawna Sharma
Last Updated: Jun 13 2018 19:10

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों की टीचरों के लिए नए नियम जारी किए हैं। इन नए नियमों के मुताबिक यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में टीचरों की भर्ती व प्रमोशन के लिए अब पीएचडी को अनिवार्य कर दिय गया है। इसके साथ ही पीएचडी और एमफिल कर रहे स्‍टूडेंट को भी भत्ता मिलेगा। 

जारी किए नए नियम इस प्रकार हैं: 

-टीचरों को 2010 के रेग्‍यूलेशन के तहत मिलने वाले इंसेंटिव जारी रहेंगे। हालांकि अब एमफिल और पीएचडी स्‍कॉलर्स को भी इंसेंटिव मिलेंगे। 

-पर्फार्मेंस बेस्‍ड अप्रेजल सिस्‍टम (PBAS) पर आधारित API को खत्‍म कर दिया गया है। इसके बदले ग्रेडिंग सिस्‍टम लागू किया गया है।

-कॉलेजों के टीचरों के प्रमोशन में CAS (करियर एडवांसमेंट स्‍कीम) टीचिंग पर ज्‍यादा ध्‍यान देगा।

-विश्‍व के टॉप 500 यूनिवर्सिटीज़ से पीएचडी किए हुए लोगों की बतौर असिस्‍टेंट प्रोफेसर नियुक्ति हो सकेगी।

-पीएचडी होने पर ही असिस्‍टेंट प्रोफेसर का प्रमोशन होगा। ये नियम 1 जुलाई 2021 से लागू होंगे। 

- विश्‍वविद्यालयों में वर्तमान में स्‍वीकृत 10 फीसदी टीचरों को सीनियर प्रोफेसर बनाया जाएगा। सीनियर प्रोफेसर की नियुक्ति डायरेक्‍ट भी हो सकती है और CAS के जरिए प्रमोशन मिलने के बाद भी पद भरे जा सकते हैं। 

-ओलंपिक, एशियन गेम्‍स और कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में मेडल जीतने वालों के लिए स्‍पेशल कैटगरी बनाई गई है। इसके तहत मेडल जीतने वालों को असिस्‍टेंट डायरेक्‍टर, कॉलेज डायरेक्‍टर, डिप्‍टी डायरेक्‍टर के लिए योग्‍य माना जाएगा।