कर्नाटक चुनाव पर अमेर‍िकी अखबार की राय- व्‍हाट्सऐप से लड़ा गया इलेक्‍‍‍‍‍शन

Hemant
Last Updated: May 15 2018 18:07

चुनावी बहसों और रैलियों की बातें अब पुरानी हो चुकी हैं। भारत में चुनाव अब व्हाटस एप और फेसबुक पर लड़े और जीते जा रहे हैं। अभी तक इन एप्स का इस्तेमाल लाखों लोग कॉल करने, चैट करने और जानकारियों को साझा करने के लिए किया जाता था। सोशल एक्टिविस्ट और चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि अब इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल झूठी खबरें और धार्मिक उन्माद को फैलाने के लिए हो रहा है। इस महीने कर्नाटक में हाई प्रोफाइल चुनाव करवाया गया। इस चुनाव को लोकसभा चुनावों की पहली किश्त के तौर पर लड़ा गया था। देश की दो बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने दावा किया था कि वे 20,000 से ज्यादा व्हाटसएप ग्रुप के जरिए 15 लाख समर्थकों तक सेकेंड भर में अपने संदेश पहुंच सकते हैं। लेकिन इनमें से कुछ संदेश झूठे और उन्माद भड़काने वाले, अपने राजनीतिक विरोधी के बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाले थे। इनसे देश में रह रहे हिन्दू राष्ट्रवादियों और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के बीच तनाव बढ़ाने का भी प्रयास किया गया। येे सारी बातें अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्‍ट ने अपनी ताजा खबर में लिखी हैं।