तीसरी बच्ची उसकी नहीं, साबित करने के लिए होगा सरपंच का डीएनए टेस्ट

Hemant
Last Updated: Mar 14 2018 19:17

अपनी तरह के पहले मामले में, गुजरात में अमरेली जिले के एक गांव की महिला सरपंच से डीएनए टेस्ट कराने के लिए कहा गया है, जिससे यह साबित हो सके कि वह तीसरी बच्ची की मां नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो वह पद के लिए अयोग्य घोषित कर दी जाएगी। जिला विकास अधिकारी ने पिछले हफ्ते तोरी गांव की निर्वाचित सरपंच ज्योति राठौर को यह टेस्ट करवाने के निर्देश दिए हैं। ज्योति पिछले साल 29 दिसंबर को अमरेली जिले के कूकावाव तालुका स्थित तोरी गांव की सरपंच चुनी गई थीं। उनसे तालुका विकास अधिकारी (टीडीओ) एनपी मालवीय के सस्पेंशन ऑर्डर को चैलेंज करने के बाद डीएनए टेस्ट करवाने को कहा गया है। मालवीय ने ज्योति को बाला राठौर की एक शिकायत के बाद सस्पेंड किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ज्योति 6 साल की एक बच्ची की मां हैं। आरोप है कि सरपंच ने बच्ची की मां का नाम नीता और पिता का नाम भारत दर्ज करवाया है। पंचायती राज ऐक्ट के मुताबिक दो से ज्यादा संतानें होने पर सरपंच को अयोग्य घोषित कर दिया जाता है। शिकायत करने वाले बालाभाई राठौर ने कहा, 'नीता ज्योति का ही दूसरा नाम है और पिता का नाम भारतभाई भी फर्जी है। ऐसे कागज तीसरे बच्चे की पहचान छुपाने के लिए तैयार किए गए हैं। मुझे भरोसा है कि अगर ठीक से डीएनए टेस्ट हुआ तो साबित हो जाएगा कि वह ज्योति की बेटी है।'