फिर विवादों में फंस सकते हैं संजय दत्त

Rishu Grover
Last Updated: Jan 13 2018 15:29

महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि वह अभिनेता संजय दत्त को मिली हर पैरोल या फरलो के औचित्य को साबित कर सकती है। इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सवाल पूछा कि क्या यही नियम सभी कैदियों पर लागू होते हैं। कोर्ट ने सरकार से एक आम कैदी को दी जानी पैरोल और फरलो की विस्तृत जानकारी हलफनामे के तौर दाखिल करने का निर्देश दिया। संजय दत्त को 1993 के मुंबई बम धमाकों के मामले में पांच साल की सजा हुई थी लेकिन अच्छे चालचलन को देखते हुए 8 महीने और 16 दिन पहले ही 25 फरवरी 2016 में ही उनकी रिहाई हो गई। महाराष्ट्र सरकार के एडवोकेट जनरल आशुतोष ने कहा कि संजय दत्त कानून का उल्लंघन कर एक भी मिनट या सेकेंड के लिए जेल से बाहर नहीं गए।आगे महाराष्ट्र सरकार की ओर से कहा गया कि संजय को बेटी की बीमारी और पत्नी की सर्जरी के लिए पैरोल दी गई। बता दें कि संजय दत्त सजा के दौरान 5 महीने से ज्यादा समय तक पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर रहे थे। जिसके बाद इसका अन्य कैदियों के परिजन और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध किया था।