धार्मिक महत्व और सेहत के लिए वरदान है दूर्वा घास

Last Updated: Jul 23 2019 19:53
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अक्सर पूजा में भगवान गणेश को अर्पित की जाने वाली दूर्वा का लोग सिर्फ धार्मिक महत्व जानते हैं। लेकिन जिन लोगों को इसके औषधीय गुणों की समझ होती है वो दूर्वा का इस्तेमाल सेहत ही नहीं अपनी खूबसूरती को बनाए रखने के लिए भी करते हैं। बहुत कम ही लोग जानते हैं कि हिन्दू संस्कारों में उपयोग करने के अलावा दूर्वा घास यौन रोगों, लीवर रोगों, कब्ज जैसी कई परेशानियों के उपचार में रामबाण माना जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार दूर्वा का स्वाद कसैला-मीठा होता है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, पोटाशियम पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। इसका सेवन करने से मुंह के छाले ही नहीं कई तरह के पित्त एवं कब्ज विकारों को ठीक करने में भी मदद मिलती है। दूर्वा पेट, यौन, और लीवर संबंधी रोगों के लिए असरदार मानी जाती है।

दूर्वा घास शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करती है। दूर्वा का सेवन करने से व्यक्ति को अनिद्रा, थकान, तनाव जैसे रोगों को ठीक करने में फायदा मिलता है। दूर्वा में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-सेप्टिक गुणों की वजह से त्‍वचा संबंधी समस्‍याओं में लाभ मिलता है। इसका सेवन करने से त्‍वचा संबंधी परेशानी जैसे-खुजली, त्वचा पर चकत्‍ते और एक्जिमा जैसी समस्‍याओं से राहत मिलती है।  

आजकल खराब लाइफस्टाइल के चलते हर दूसरा व्यक्ति एनीमिया का शिकार है। ऐसे लोगों के लिए दूर्वा का रस अमृत हो सकता है। दरअसल दूर्वा के रस को हरा रक्त भी कहा जाता है, क्‍योंकि इसे पीने से एनीमिया की समस्‍या दूर होती है। दूर्वा पर सुबह उटकर नंगे पांव चलने से आंखों की ज्योति बढती है। दूर्वा की पत्तियों को गर्म पानी में उबालकर हर रोज कुल्ला करने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।