घर परिवार की मजबूरी करवाती है बच्चो से बाल मजदूरी

Last Updated: Jun 13 2019 15:38
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बाल श्रम के विरोध में आज पूरी दुनिया एंटी चाइल्ड लेबर डे सेलिब्रेट कर रही है। इस दिवस की शुरुआत साल 2002 में 14 साल से कम उम्र के बच्‍चों को बाल मजदूरी से निकालकर शिक्षा दिलाने के उद्देश्‍य से 'द इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन' ने की थी। हालांकि 17 साल गुजरने के बाद भी भारत में बाल मजदूरी पर लगाम कस पाना मुश्किल लग रहा है।

भारत में बाल श्रम को लेकर स्पष्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन, साल 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 5-14 वर्ष की आयु के एक करोड़ से भी ज्यादा बच्चे बाल श्रम की दलदल में धकेले गए हैं।  अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में लगभग 15.2 करोड़ बच्चे बाल श्रम के लिए मजबूर हैं। भारत में मजदूरी करने वाले बच्चों में एक बड़ी तादाद ग्रामीण इलाकों से ताल्लुक रखती है। 
 
भारत में बाल मजदूरों का सबसे ज्यादा संख्या 5 बड़े राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में हैं। यहां बाल मजदूरों की कुल लगभग 55 प्रतिशत है। सबसे ज्यादा बाल मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार से हैं। पूरी दुनिया में बाल मजदूरों की सबसे ज्यादा संख्या अफ्रीका में है। अफ्रीका में 7.21 करोड़ बच्चे बाल श्रम की कैद में हैं, जबकि एशिया-पैसेफिक में 6.21 करोड़ बच्चे बाल मजदूरी कर रहे हैं। दुनिया के सबसे विकसित कहे जाने वाले देश अमेरिका में बाल मजूदरों की संख्या एक करोड़ के पार है।