लद्दाख की ये हसीन वादियां जो मोह लेंगी आपका भी मन

Last Updated: Mar 05 2019 17:14
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जम्मू और कश्मीर में स्थित लद्दाख अपने में अनोखी विशेषताओं को समेटे हुए है। यहां कुदरत की सुन्दरता के साथ-साथ यहां की संस्कृति और धार्मिक-ऐतिहासिक विरासत भी इसे पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाता है। समुद्र तल से करीब 10000 कि.मी. की ऊंचाई पर स्थित लद्दाख में मानव-सभ्यता का इतना समृद्धशाली रूप देख कर हर कोई दंग हो जाता है। हवाई-जहाज से देखा जाये तो यहां दूर-दूर तक फैले पहाड़ और हरी-भरी घाटियां का अनोखा दृश्य देखने को मिलता है। अगर आप ट्रेकिंग, स्कीइंग के शौक़ीन हैं तो लद्दाख आपके लिए बेहद रोमांचक स्थल है। यहां की रूहानी वादियां, संस्कृति आपके दिल को छू जाएगी। 

जानिए कौन-कौन से स्थल है सबसे ज्यादा मशहूर 

लेझ महल 


पहाड़ की चोटी पर बना ये महल ल्हासा के प्रसिद्ध पोटाला महल का लघु-संस्करण माना जाता है। इस महल को राजा सिंग्मे नामग्याल ने 17 वीं शताब्दी में बनवाया था। यह महल तिब्बती कारीगरी का बेहतरीन नमूना है। यह महल नौ मंजिलों का है। इस महल से जुड़े कई मंदिर भी हैं जो आमतौर पर बंद रहते हैं।
इन मंदिरों को पुजारी सुबह और शाम के वक्त ही पूजा करने के लिए खोलता है। भारत के अन्य महलों से बिल्कुल अलग व साधारण, लेह महल अपनी एक अलग चमक के साथ लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। 


लेह मस्जिद

लेह मस्जिद को का निर्माण देलदन नामग्याल ने अपनी माँ की याद में करवाया था, जो मुस्लिम थीं। यह मस्जिद 17 वीं शताब्दी की कलात्मक शैली का बेजोड़ नमूना है।


गोस्पा तेस्मो 

गोस्पा तेस्मो लद्दाख के दर्शनीय स्थलों में से एक है। इस मठ में महात्मा बुध्द की विशाल प्रतिमा इस मठ की खूबसूरती में चार चाँद लगा देती है। लेह महल के पास ही बनाया गोस्पा अर्थात बौद्ध मठ एक शाही मठ है। महात्मा बुद्ध की प्रतिमा से सुसज्जित यह मठ पर्यटकों को दूर से ही आकर्षित करता है। ये लेह से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पीतल की बौद्ध की प्रतिमा देखने योग्य है। 165० के आसपास इसका निर्माण हुआ था। अब यह जर्जर अवस्था में है, मगर बौद्ध मंदिर में जब आप प्रवेश करेंगे तो आपको बहुत शांति का अनुभव होगा।


नुब्रा घाटी

यह तीन भुजाओं वाली घाटी है, जो लद्दाख घाटी के उत्तर-पूर्व में स्थित है। इस घाटी की ऊंचाई 10000 फीट है। इसका प्राचीन नाम डुमरा (फूलों की घाटी) था। श्योक और नुब्रा नदी के बीच है यह घाटी। यहां आप रेत के टिब्बे देख सकते हैं। दो कूबड़ वाले ऊंट की सवारी भी की जा सकती है। लेह-लद्दाख का नाम जेहन में आते ही एक असीम प्राकृतिक सुंदरता दिमाग में कौंधने लगती है। सच में लेह-लद्दाख एक ऐसी जगह है जहां प्रकृति ने कदम-कदम पर इतना सौंदर्य बिखेरा है कि कोई भी अभिभूत हो सकता है। लेह जाने के लिए मई के अंतिम सप्ताह से सितंबर तक का मौसम अच्छा माना है, लेकिन बर्फीला सौंदर्य देखने के लिए लोग सर्दियों में भी यहां जाना पसंद करते हैं। अगर आपका भी मन है कुछ ऐसा देखने के लिए, वहां की जिंदगी का अनुभव लेना चाहते हैं तो एक बार जरूर लेह-लद्दाख जाए।