लिव-इन रिलेशनशिप में सहमति से संबंध बनाने पर नहीं चलेगा रेप का मुकदमा

Last Updated: Jan 03 2019 12:59
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लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे लोंगो के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध में रेप का मुकदमा नहीं चल सकता। कोर्ट ने कहा कि इस संबंध के विफल होने और पुरुष के किन्‍हीं कारणों से शादी से मुकर जाने के बाद उसके खिलाफ रेप का केस नहीं चलाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में नर्स द्वारा डॉक्टर के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को खारिज कर दिया। वे काफी समय से लिव-इन रिलेशनशिप में थे।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, 'बलात्कार और सहमति से बनाए गए यौन संबंध के बीच स्पष्ट अंतर है। इस तरह के मामलों को अदालत को पूरी सतर्कता से परखना चाहिए कि क्या शिकायतकर्ता वास्तव में पीड़िता से शादी करना चाहता था या उसकी गलत मंशा थी और अपनी यौन इच्छा को पूरा करने के लिए उसने झूठा वादा किया था, क्योंकि गलत मंशा या झूठा वादा करना ठगी या धोखा करना होता है।' उन्होंने यह भी कहा कि अगर आरोपी ने पीड़िता के साथ यौन इच्छा की पूर्ति के एकमात्र उद्देश्य से वादा नहीं किया तो यह बलात्कार का मामला नहीं माना जाएगा।