गौरक्षा मामले को लेकर कोर्ट में होगा विचार विमर्श, सुप्रीम कोर्ट हुई सख़्त

Last Updated: Jul 03 2018 18:41

देश के अलग-अलग राज्‍यों में गौरक्षा के नाम पर हिंसा करने के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख़्त नज़र आ रही है। गौरक्षा के नाम पर हिंसा करने वाले समूहों के साथ सख़्ती से निपटने की हिदायत दी जा रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है। बताया जा रहा है कि कोर्ट इस मामले में विस्तृत आदेश जारी करेगा, जिसमें घटना की जवाबदेही तय करने, पीड़ित को मुआवज़ा और मामलों की निगरानी जैसी बातों को ध्‍यान में रखा जाएगा।

चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि गौरक्षा के नाम पर हिंसा की वारदातें ना हों, इसे सुनिश्चित करना राज्‍य सरकारों का दायित्‍व बनता है। फिर चाहे कानून हो या नहीं, कोई भी समूह कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गौरक्षकों द्वारा हिंसा को रोकने के लिए कोर्ट विस्तृत आदेश जारी करेगा। मॉब लिंचिंग के पीड़ितों को मुआवज़े के लिए इंदिरा जयसिंह ने कहा कि धर्म, जाति और लिंग को ध्यान में रखा जाए। चीफ़ जस्टिस ने कहा कि ये उचित नहीं है। पीड़ित सिर्फ़ पीड़ित होता है और उसे अलग-अलग खांचे में नहीं बांटा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को आदेश जारी कर कहा कि सभी राज्यों में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए हर ज़िले में वरिष्ठ पुलिस अफ़सर नोडल बनाए जायेंगे, जो ये सुनिश्चित करें कि कोई भी विजिलेंटिज्म ग्रुप कानून को अपने हाथों में ना ले। अगर कोई घटना होती है, तो नोडल अफ़सर कानून के हिसाब से कारवाई करे।